वैश्विक नदी बेसिन के 36 प्रतिशत हिस्से में सामान्य से कम जल प्रवाह दर्ज हुआ
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) की रिपोर्ट ने दुनिया भर में जल संसाधनों की गंभीर स्थिति पर चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में दुनिया की नदियां पिछले 35 सालों में सबसे सूखी रहीं। वैश्विक नदी बेसिन के करीब 36 प्रतिशत हिस्से में सामान्य से कम जल प्रवाह दर्ज किया गया, जबकि लगातार सातवें साल सामान्य नदी प्रवाह वाले बेसिन बेहद कम रहे। 1991-2020 के औसत में जहां करीब 46 प्रतिशत बेसिन सामान्य स्थिति में रहते थे, वहीं 2021 से 2025 के बीच यह आंकड़ा सिर्फ 34 से 38 प्रतिशत तक सिमट कर रह गया। यह स्थिति दर्शाती है कि जल चक्र में बड़े बदलाव आ रहे हैं, जिससे कहीं नदियों का बहाव घट रहा है तो कहीं बारिश बाढ़ बनकर तबाही मचा रही है। एशियाई महाद्वीप में जल संकट का दोहरा रूप देखने को मिला। मिडिल एशिया और मिडिल ईस्ट के कई हिस्सों में नदी प्रवाह सामान्य से कम दर्ज किया गया, जिससे पानी की कमी की आशंका बढ़ गई। दूसरी ओर, दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई क्षेत्रों में 2025 के दौरान सामान्य से ज्यादा पानी दर्ज किया गया। हालांकि, यह अतिरिक्त पानी भी अक्सर बाढ़ और अत्यधिक मानसूनी बारिश के रूप में आया, जिसने श्रीलंका, पाकिस्तान, वियतनाम, इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया और फिलीपींस जैसे देशों में हजारों लोगों की जान ली और भारी तबाही मचाई। पिछले पांच सालों में एशिया और अफ्रीका पानी से जुड़ी समस्याओं से सबसे ज्यादा प्रभावित रहे, जहां 80 प्रतिशत से ज्यादा मौतें हुईं। भारत के लिए भूजल और जल भंडारण की समस्या सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। रिपोर्ट में उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम जल भंडारण दर्ज होने की बात कही गई है। उत्तर-पश्चिमी भारत में लगातार गिरता जलस्तर लंबे समय के जल संकट की ओर इशारा करता है। भारत की खेती, पानी और उद्योगों की बड़ी जरूरतें भूजल से पूरी होती हैं, ऐसे में कमजोर मानसून और बढ़ते तापमान से आने वाले समय में पानी की भारी कमी का सामना करना पड़ सकता है। वैश्विक ग्लेशियरों का पिघलना एक और गंभीर चिंता का विषय है। साल 2025 में दुनिया भर के ग्लेशियरों ने करीब 408 गीगाटन बर्फ पिघला दी, जिससे समुद्र का पानी करीब 1.1 मिलीमीटर तक ऊपर आ गया। यह लगातार चौथा साल है जब सभी बड़े ग्लेशियर इलाकों में बर्फ की कमी हुई है। हिमालयी ग्लेशियर भारत और पूरे दक्षिण एशिया के लिए बेहद अहम हैं, क्योंकि गंगा, सिंधु और ब्रह्मपुत्र जैसी प्रमुख नदियों पर इनका सीधा असर पड़ता है। तेजी से पिघलते ग्लेशियर पहले अचानक बाढ़ और तेज बहाव का खतरा बढ़ा सकते हैं। वहीं, लंबे समय में सूखे मौसम में पानी की कमी और गहरा सकती है। यह स्थिति भारत समेत दुनियाभर में पानी के संकट को और गंभीर बना रही है। 2025 में जमीन पर मौजूद कुल जल भंडारण में भी लगातार गिरावट दर्ज की गई है, जो भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा है। डब्ल्यूएमओ की स्टेट ऑफ ग्लोबल वॉटर रिसोर्सेज 2025 रिपोर्ट ने स्पष्ट किया है कि दुनिया भर में जल पैटर्न बदल रहा है। कहीं नदियों का बहाव सामान्य से कम हो गया है तो कहीं अचानक इतनी बारिश हो रही है कि बाढ़ जैसे हालात पैदा हो जाते हैं।



