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भारत ने शुक्रवार को कहा कि वह अमेरिकी श्रम विभाग की ओर से कुछ कंपनियों के लिए ‘परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन’ (पीईआरएम) कार्यक्रम को लेकर किए गए फैसले से अवगत है। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने स्पष्ट किया कि पीईआरएम आवेदन प्रक्रिया को निलंबित किए जाने का मौजूदा एच-1बी वीजा या एच-1बी वीजा धारकों और उनके आश्रितों की स्थिति पर सीधा असर नहीं पड़ेगा। मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका की ओर से उठाए गए ये कदम दोनों देशों की साझा आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने वाले नहीं हैं। यह निर्णय ऐसे समय आया है जब ट्रंप प्रशासन ने भारत की इन्फोसिस, टाटा, विप्रो और एचसीएल समेत आठ बड़ी टेक्नोलॉजी और आउटसोर्सिंग कंपनियों के लिए रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया के एक महत्वपूर्ण हिस्से पीईआरएम को निलंबित करने की घोषणा की थी। इस कार्रवाई में कॉग्निजेंट, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी भी शामिल हैं। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि पीईआरएम प्रक्रिया पर रोक का असर प्रभावित कंपनियों के उन कर्मचारियों पर पड़ सकता है, जो स्थायी निवास या ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया में हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि प्रतिभाओं की आवाजाही (टैलेंट मोबिलिटी) दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए फायदेमंद है। यह भारतीयों के लिए अवसर पैदा करती है, वहीं अमेरिकी कंपनियों को उच्च कौशल वाले प्रतिभाशाली पेशेवर, नवाचार, शोध, उत्पादकता, प्रतिस्पर्धा और रोजगार सृजन में मदद मिलती है। इससे अमेरिकी शेयरधारकों को भी लाभ होता है। मंत्रालय ने कहा कि वह इस मामले से जुड़े घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए है। अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सोंडरलिंग ने जेडी वेंस के साथ आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि यह कदम चल रही आपराधिक और संघीय जांचों के आधार पर उठाया गया है।
भारत ने इस मुद्दे पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की टिप्पणियों की भी आलोचना की और उन्हें ‘अनावश्यक’ बताया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी उपराष्ट्रपति की कुछ टिप्पणियां भी देखी हैं। मंत्रालय का मानना है कि इस तरह के बयान अनुचित हैं और इस तथ्य को नजरअंदाज करते हैं कि अमेरिका में काम कर रहे भारतीय पेशेवर उच्च शिक्षित और कुशल लोग हैं, जो वहां की अर्थव्यवस्था और नवाचार तंत्र में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। भारत ने कहा कि ऐसे शब्दों का इस्तेमाल, जिनसे ऐतिहासिक और औपनिवेशिक दौर की पीड़ादायक यादें जुड़ी हों, बेहद आपत्तिजनक है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि यह ऐसा क्षेत्र है जिसमें दोनों देशों को बड़ा पारस्परिक लाभ मिलता है। हमारी उम्मीद है कि इस प्रक्रिया से जुड़े सभी पक्ष इस तथ्य को समझेंगे। अमेरिका की ओर से घोषित कदम दोनों देशों की साझा महत्वाकांक्षाओं को आगे नहीं बढ़ाते। यह समझना जरूरी है कि पीईआरएम, एच-1बी वीजा कार्यक्रम से अलग है। पीईआरएम आवेदनों के निलंबन से अपने आप मौजूदा एच-1बी वीजा या एच-1बी धारकों और उनके परिवारों की कानूनी स्थिति प्रभावित नहीं होती। हालांकि, इससे प्रभावित कंपनियों के पात्र कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर कुछ असर पड़ सकता है। ट्रंप प्रशासन ने गुरुवार को भारत की इन्फोसिस, टाटा, विप्रो और एचसीएल समेत आठ बड़ी टेक्नोलॉजी और आउटसोर्सिंग कंपनियों के लिए रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया के एक महत्वपूर्ण हिस्से पीईआरएम को निलंबित करने की घोषणा की थी। इस कार्रवाई में कॉग्निजेंट, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी भी शामिल हैं।
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