भारतीय शेयर बाजार बुधवार को भारी गिरावट के साथ बंद हुआ। आरबीबाई द्वारा रेपो दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी ने निवेशकों में बिकवाली को बढ़ावा दिया, जिससे प्रमुख सूचकांकों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इस कदम से यह दर फरवरी 2023 के बाद पहली बार बढ़ी है। रेपो दर में यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब बाजार विश्लेषक और निवेशक मुद्रास्फीति के दबावों पर केंद्रीय बैंक की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे थे। जानकारों के अनुसार, आरबीआई का यह कदम चक्रीय महंगाई के बढ़ते जोखिम को दिखाता है, जिसके कारण केंद्रीय बैंक को अर्थव्यवस्था में तरलता को नियंत्रित करने और कीमतों को स्थिर रखने के लिए सख्त रुख अपनाना पड़ा है। दरें बढ़ने से कंपनियों की उधार लेने की लागत बढ़ सकती है, जिससे उनकी आय और भविष्य के निवेश पर असर पड़ सकता है। यही चिंता निवेशकों की बिकवाली का एक बड़ा कारण बनी। सुबह बाजार खुलते ही सेंसेक्स करीब 450 अंक टूट गया था, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 22,620 के करीब कारोबार कर रहा था। दिन भर के कारोबार के बाद 30 शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 429.11 अंक टूटकर 72,638.70 पर बंद हुआ। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी भी 173.05 अंक फिसलकर 22,603.05 पर बंद हुआ। बाजार में बिकवाली के कारण तकरीबन 2251 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि केवल 1928 शेयरों में बढ़त आई। 192 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। आज निफ्टी में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज करने वाले शेयरों में टाइटन कंपनी, अडानी एंटरप्राइजेज, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, जेएस डब्लयू स्टील और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स प्रमुख थे, जिन्होंने निवेशकों को निराश किया। हालांकि, कुछ शेयर ऐसे भी थे जिन्होंने इस गिरावट भरे माहौल में भी अपनी बढ़त बनाए रखी। इनमें कोटक महिंद्रा बैंक, बीएसई लिमिटेड, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक और कोल इंडिया शामिल थे। सेक्टरों की बात करें तो, मीडिया और पीएसयू बैंक को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स, सूचना प्रौद्योगिकी, वाहन, धातु और रियल्टी सेक्टरों में 1-2 फीसदी की भारी गिरावट रही। यह गिरावट व्यापक आर्थिक चिंताओं से सभी सेक्टरों के प्रभावित होने का संकेत देती है। बाजार में यह गिरावट दुनिया भर से मिले कमजोर संकेतों के साथ ही बिकवाली हावी रहने से आई है।
अर्थव्यवस्था में तरलता को नियंत्रित करने और कीमतों को स्थिर रखने के लिए सख्त रुख अपनाया गया। निवेशकों पर विपरीत प्रभाव पड़ा जिससे बाजार में बिकवाली शुरू हो गयी।






