केंद्रीय कर एवं सीमा शुल्क, बेंगलुरु अंचल में आयोजित समारोह में भारतीय भाषाओं के सम्मान और हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा दिया गया
समारोह में गृह पत्रिका ‘वृंदावन’ का विमोचन हुआ, अधिकारियों ने कविता पाठ और हिंदी गीतों की प्रस्तुति दी
केंद्रीय कर एवं सीमा शुल्क, बेंगलुरु अंचल ने राजभाषा हिंदी के प्रभावी प्रयोग और भारतीय भाषाओं के महत्व को रेखांकित करने के लिए एक राजभाषा सम्मेलन एवं हिंदी पखवाड़ा समापन समारोह का आयोजन किया। यह कार्यक्रम भारत सरकार के गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग के निर्देशों के तहत आयोजित हुआ, जिसमें हिंदी के साथ-साथ कन्नड़ सहित सभी भारतीय भाषाओं के सम्मान पर विशेष जोर दिया गया। समारोह में कार्यालयीन कार्यों में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग और आधुनिक तकनीकी साधनों के उपयोग को भी प्रोत्साहित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन से हुआ। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलन के साथ समारोह का विधिवत उद्घाटन किया गया। सीमा शुल्क, बेंगलुरु अंचल के मुख्य आयुक्त आशीष चंदन, केंद्रीय कर बेंगलुरु अंचल की मुख्य आयुक्त काजल सिंह, मुख्य आयुक्त करण वर्मा और मुख्य अतिथि मैथिल पी। राव ने मिलकर दीप प्रज्ज्वलित किया। उद्घाटन सत्र के उपरांत स्वागत भाषण प्रस्तुत किया गया और केंद्रीय गृह मंत्री के संदेश का वाचन किया गया। समारोह का एक प्रमुख आकर्षण विभागीय गृह पत्रिका ‘वृंदावन’ का विमोचन रहा। इस पत्रिका में प्रकाशित रचनाओं की उपस्थित अधिकारियों और दर्शकों ने मुक्त कंठ से सराहना की। मुख्य अतिथि मैथिल पी। राव ने अपने संबोधन में हिंदी साहित्य, अनुवाद और भाषा प्रचार के संदर्भ में कन्नड़ और हिंदी के बीच गहरी समानता और निकटता पर प्रकाश डाला। उन्होंने हिंदी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और उसके महत्व को भी रेखांकित किया। वर्ष 2025 में उत्कृष्ट राजभाषा कार्यान्वयन के लिए विभिन्न अनुभागों, मंडलों और कार्यालयों को रोलिंग शील्ड प्रदान की गई।
यह पुरस्कार अन्य कार्यालयों को भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करेगा। हिंदी प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया। आशीष चंदन ने कार्यालयीन कार्यों में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग का आह्वान किया। उन्होंने अधिकारियों को इस दिशा में सक्रिय रहने को कहा। यह तकनीक के माध्यम से भाषा को सुलभ बनाने की एक पहल है।
यह दर्शाता है कि भाषा नीति केवल सरकारी कामकाज तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यावसायिक जगत पर भी प्रभाव पड़ता है। पूजा शर्मा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ समारोह का समापन हुआ। उन्होंने सभी उपस्थित अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। इसने भाषा, संस्कृति और प्रौद्योगिकी के संगम को प्रदर्शित किया।








