प्रधानमंत्री मोदी ने 'वी विल डु इट' का उद्घोष किया, राष्ट्र को बदलने का संकल्प
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'वी विल डु इट' का उद्घोष करते हुए देश के सामने एक नई दिशा रखी है, जो आत्मविश्वास और सामूहिक संकल्प पर आधारित है। उन्होंने स्वीकार किया कि उनके राजनीतिक विरोधियों और आलोचकों ने ही उन्हें लोकतंत्र की ताकत और आत्म-निरीक्षण का महत्व सिखाया है, जिससे वे खुद को आज भी एक विद्यार्थी मानते हैं। यह सीखने की लगन ही उन्हें निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। यह उद्घोष विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो भारत की क्षमता पर संदेह करते हैं और देश को अशक्त मानते हैं। ऐसे लोगों को यह समझना चाहिए कि जब समस्याएं सामूहिक होती हैं, जैसे खेतों में पानी की कमी या बिजली का न होना, तो उसका समाधान भी सबके लिए होना चाहिए। प्रधानमंत्री की यह सोच संविधान से प्रेरित है और सभी राजनीतिक दलों को इसी राह पर चलना चाहिए, क्योंकि जनता ही सर्वोपरि है। प्रधानमंत्री के शासनकाल में अनुच्छेद 370 का हटना, नक्सलवाद का अंत और सीमा पार कार्रवाई जैसे कई कार्य हुए हैं, जो देश की क्षमता को दर्शाते हैं। ये उपलब्धियां दिखाती हैं कि असंभव लगने वाले कार्य भी संभव हैं, बशर्ते उनमें सही नेतृत्व और सामूहिक इच्छाशक्ति हो। यह भारत के लिए तेज गति से आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। वास्तव में, राजनेताओं का कर्तव्य जनता के कष्टों को समझना और उनका समाधान करना है। प्रधानमंत्री ने अपने 25 वर्ष के कार्यकाल में जनसेवा को प्राथमिकता दी है और इस दौरान उन्होंने राष्ट्र को बदलने का प्रयास किया है। 25वां वर्ष पूरा करते हुए भी वे नए लक्ष्यों को प्राप्त करने के उत्साह से भरे हुए हैं।



