गिल ने फील्डिंग और डेथ ओवर गेंदबाजी में सुधार की जरूरत बताई, कहा प्रयोग का समय नहीं
भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान शुभमन गिल ने वेस्टइंडीज के खिलाफ हालिया वनडे सीरीज हारने के बाद टीम की तैयारियों और कमजोरियों पर खुलकर बात की है। उन्होंने साफ किया कि रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे अनुभवी खिलाड़ी अच्छी फॉर्म में हैं और विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट से पहले उनके स्थान पर कोई प्रयोग करने की जरूरत नहीं है। गिल ने फील्डिंग में सुधार और डेथ ओवरों में गेंदबाजी की रणनीति को लेकर भी चिंता जताई, जो टीम के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। इस सीरीज में भारतीय टीम का प्रमुख गेंदबाजी आक्रमण उपलब्ध नहीं था, क्योंकि जसप्रीत बुमराह एशियन गेम्स में व्यस्त थे और हार्दिक पंड्या चोटिल थे। मोहम्मद सिराज भी केवल एक मैच खेल पाए। ऐसे में अंशुल कंबोज, गुरनूर बराड़, नमन धीर और औकीब नबी जैसे नए गेंदबाजों को मौका मिला, जिन्होंने पारी के आखिरी ओवरों में गेंदबाजी की। प्लेयर ऑफ द सीरीज चुने गए शुभमन गिल ने सीरीज में 334 रन बनाए, जिसमें गुवाहाटी में 406 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए खेली गई नाबाद डबल सेंचुरी भी शामिल थी। हालांकि, तीसरे वनडे में वह जेडन सील्स की गेंद पर शाई होप द्वारा एक हाथ से कैच लपके जाने के कारण जल्दी आउट हो गए। गिल ने इस पर निराशा जताई, लेकिन कहा कि उस गेंद पर वह ज्यादा कुछ नहीं कर सकते थे। दूसरी ओर, वेस्टइंडीज के शाई होप ने शानदार प्रदर्शन करते हुए नाबाद 162 रन की पारी खेली। उन्होंने 143 गेंदों का सामना करते हुए यह स्कोर बनाया। यह सीरीज में उनका लगातार दूसरा शतक था, जिसकी बदौलत वेस्टइंडीज ने 352 रन का लक्ष्य 48.2 ओवर में हासिल कर लिया। होप ने अपनी सफलता का श्रेय एमएस धोनी की सलाह को दिया, जिन्होंने उन्हें नतीजे के बजाय प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करने और बल्लेबाज के पास उपलब्ध समय को समझने की सलाह दी थी। गिल ने सीरीज में भारत की फील्डिंग पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि टीम ने करीब 6-7 कैच छोड़े। उन्होंने कहा कि यह विश्व कप से पहले एक अच्छा संकेत नहीं है और फील्डिंग को टॉप क्लास बनाने की जरूरत है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि विपक्षी टीम के 5-6 विकेट गिरने के बाद फील्ड सेट करने को लेकर टीम में असमंजस की स्थिति रहती है। कप्तान गिल ने डेथ बॉलिंग को लेकर भी सुधार की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि कभी-कभी टीम स्पष्ट नहीं होती कि डेथ ओवरों में अटैक करना है या डिफेंड करना है। खासकर तब जब विपक्षी टीम के 5 या 6 विकेट गिर चुके हों, तो फील्ड प्लेसमेंट को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है। यह भी सवाल उठता है कि क्या डेथ बॉलिंग बहुत जल्दी शुरू कर दी गई है या अभी भी मिडिल ओवरों की तरह ही गेंदबाजी की जा रही है। स्लो ओवर रेट की समस्या ने भी टीम को तीसरे वनडे में परेशान किया। भारत 46वें ओवर के बाद तय समय से चार ओवर पीछे चल रहा था। इसके कारण, आखिरी ओवरों में टीम को 5 की जगह सिर्फ 4 फील्डर को बाउंड्री के बाहर रखने की अनुमति मिली। गिल के अनुसार, इस स्लो ओवर रेट ने मैच का रुख बदल दिया, क्योंकि वेस्टइंडीज ने इसका फायदा उठाकर मैच जीत लिया। गिल ने कहा, ‘मुझे लगता है कि मैच हमारे नियंत्रण में था, लेकिन हम चार ओवर पीछे थे और आखिरी में उन्होंने इसका फायदा उठाकर मैच हमसे छीन लिया। ’ उन्होंने स्वीकार किया कि स्लो ओवर रेट के कारण उन्हें फील्डिंग की रणनीति में बदलाव करना पड़ा, जिसका खामियाजा टीम को भुगतना पड़ा। रोहित शर्मा और विराट कोहली की वर्तमान फॉर्म पर भरोसा जताते हुए गिल ने कहा कि दोनों बल्लेबाज बेहतरीन लय में हैं। उन्होंने रोहित के पिछले चार मैचों में तीसरे शतक का विशेष उल्लेख किया। यह जीत वेस्टइंडीज के लिए रैंकिंग में नंबर-10 पर होने के बावजूद नंबर-1 पर काबिज भारत को हराने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।




