दमोह: एकलव्य विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में संदेश जैन को “आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ते कदम” विषय पर पीएच.डी. की उपाधि प्रदान की गई। उन्होंने यह शोध आचार्य विद्यासागर जी महाराज के आर्थिक दर्शन और वर्तमान भारत के संदर्भ में उनके चिंतन की प्रासंगिकता पर केंद्रित रखा। संदेश जैन ने बताया कि उन्हें लगभग 10 वर्षों तक आचार्य के सान्निध्य में रहकर उनके जीवन, चिंतन और सिद्धांतों को जानने-समझने का अवसर मिला, जिसने उनके शोध को गहराई प्रदान की। शोध में आत्मनिर्भरता के व्यापक संदर्भ में श्रम, संस्कार, शिक्षा, स्वावलंबन, कृषि, स्थानीय उत्पादन, भारतीय संस्कृति, पर्यावरण, भारतीय भाषाओं, हस्तशिल्प एवं प्राचीन शिल्प-कला तथा भारतीय ज्ञान परंपरा जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया। “श्रम ही धन” और “संस्कार ही शिक्षा” जैसे विचारों को जीवनोपयोगी और प्रायोगिक बनाने की आवश्यकता पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। महिला शिक्षा तथा उनके रोजगार और आर्थिक स्वावलंबन को राष्ट्र की आत्मनिर्भरता से जोड़कर देखा गया है। यह शोध प्राचीन भारतीय आयुर्वेद एवं पारंपरिक ज्ञान को आगे बढ़ाने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है, जिसे शोध के महत्वपूर्ण पक्षों में शामिल किया गया है। शोध की दृष्टि में आत्मनिर्भर भारत केवल आर्थिक रूप से सक्षम भारत नहीं, बल्कि शिक्षा, कौशल, श्रम, संस्कार, कृषि, स्थानीय संसाधन, ज्ञान और उत्पादन की अपनी क्षमताओं को विकसित करने वाला भारत है। संदेश जैन ने कहा कि पीएच.डी. उनके लिए यात्रा का अंत नहीं, बल्कि शोध के एक नए चरण का प्रारंभ है। वे आगे भी आचार्य के चिंतन का अध्ययन प्रमाण, तथ्य और शोध-पद्धति के आधार पर जारी रखेंगे। इस अध्ययन को समकालीन भारत की आवश्यकताओं से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा, जिससे आत्मनिर्भरता की दिशा में और प्रगति हो सके। इन क्षमताओं के समन्वित विकास से भारत “भारतः प्रतिभारतः” की दिशा में आगे बढ़ सकता है और विकास का उद्देश्य लोककल्याण से जुड़ सकता है।
समाचार
एलयू में संदेश जैन को 'आत्मनिर्भर भारत' पर मिली पीएच.डी
9 अक्टूबर 2026 को 10:50 pm बजे

एलयू में संदेश जैन को 'आत्मनिर्भर भारत' पर मिली पीएच.डी
इस खबर पर आपकी प्रतिक्रिया





