प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से मिल रहा है सहायता का लाभ
बुंदेलखंड जैसे भौगोलिक और जलवायु संबंधी चुनौतियों वाले क्षेत्र में, खेत में फार्म तालाब का निर्माण और खेती के साथ एकीकृत मत्स्य पालन किसानों के लिए जल संरक्षण और अतिरिक्त आय का एक प्रभावी विकल्प साबित हो रहा है। यह प्रणाली किसानों को वर्षा जल का बेहतर उपयोग करने, सिंचाई की उपलब्धता बढ़ाने, सूखे के प्रभाव को कम करने और कृषि आधारित आय के नए अवसर सृजित करने में मदद कर सकती है। बुंदेलखंड क्षेत्र अपनी पथरीली और लाल-काली मिश्रित मिट्टी तथा वर्षा की अनिश्चितता के कारण अक्सर सूखे और जल संकट से जूझता रहा है। यहां मुख्य समस्या यह है कि मानसूनी महीनों में बारिश तो होती है, लेकिन पानी का सही प्रबंधन न होने के कारण उपजाऊ मिट्टी बह जाती है और भू-जल स्तर नीचे चला जाता है। ऐसे में, खेत में मत्स्य तालाब (फार्म पौंड) का निर्माण और उसके साथ एकीकृत मछली पालन किसानों के लिए एक वरदान साबित हो सकता है, जो उनकी खेती को लाभ का सौदा बनाने और जल संकट से निपटने में सहायक है। खेतों में तालाब निर्माण से वर्षा जल को संग्रहित कर सिंचाई एवं मत्स्य पालन के लिए उपयोग किया जा सकता है। इससे भू-जल पुनर्भरण को भी बढ़ावा मिलता है तथा सूखे के समय सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सहायता मिलती है। तालाब के निर्माण के लिए ऐसी मिट्टी का चयन करना चाहिए जिसमें चिकनी अथवा दोमट मिट्टी का पर्याप्त मिश्रण हो, ताकि पानी का रिसाव कम हो। तालाब का आकार एवं लेआउट खेत की आवश्यकता और उपलब्ध भूमि के अनुसार निर्धारित किया जाना चाहिए।
बुंदेलखंड की जलवायु एवं भौगोलिक चुनौतियों के बीच खेत में फार्म पोंड का निर्माण एवं खेती के साथ एकीकृत मत्स्य पालन किसानों के लिए जल संरक्षण और अतिरिक्त आय का प्रभावी विकल्प बन सकता है। किसान वैज्ञानिक तकनीकों एवं विभागीय मार्गदर्शन के साथ इस प्रणाली को अपनाकर वर्षा जल का बेहतर उपयोग कर सकते हैं। इससे सिंचाई की उपलब्धता बढ़ाने, सूखे के प्रभाव को कम करने तथा कृषि आधारित आय के नए अवसर सृजित करने में मदद मिल सकती है। यह एक स्थायी समाधान है जो क्षेत्र की जल संबंधी समस्याओं का समाधान करता है और किसानों की आजीविका को मजबूत करता है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत, किसानों को खेत तालाबों, मत्स्य बीज, मत्स्य आहार और अन्य आवश्यक गतिविधियों के लिए निर्धारित प्रावधानों के अनुसार वित्तीय सहायता मिल सकती है। यह योजना मत्स्य पालन क्षेत्र के समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन की गई है, जिसमें उत्पादन बढ़ाना, उत्पादकता में सुधार करना और मत्स्य पालन को एक लाभदायक उद्यम बनाना शामिल है। योजना के माध्यम से प्रदान की जाने वाली सहायता किसानों को आधुनिक तकनीकों को अपनाने और अपने मत्स्य पालन कार्यों का विस्तार करने में सक्षम बनाती है। कृषि सिंचाई और जल संरक्षण से संबंधित सरकारी योजनाएं भी किसानों के लिए महत्वपूर्ण हैं।





