भाजपा ने आरोपों को खारिज किया, कहा- बड़ी संख्या में फॉर्म जमा करना प्रतिबंधित नहीं
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कर्नाटक में मतदाता सूची को लेकर भाजपा और जद (एस) पर बड़ी साजिश रचने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान एक लाख से ज्यादा फॉर्म जबरन छीने गए और कुछ को जला दिया गया। शिवकुमार ने कहा कि ये फॉर्म मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आपत्तियां दर्ज करने के वास्ते थे, लेकिन अब उन्हें वापस लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को यह तक जानकारी नहीं थी कि वे किन बातों पर हस्ताक्षर कर रहे हैं या फॉर्म में क्या दर्ज है। शिवकुमार ने सवाल उठाया कि इन फॉर्म में मतदाताओं के नाम और अन्य चुनाव संबंधी जानकारी आखिर कहां से आई और फॉर्म किसने उपलब्ध कराए, इसकी जांच जरूरी है। निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, किसी नाम को मतदाता सूची से हटाने से पहले संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी नोटिस जारी करता है। इसके बाद सुनवाई और दस्तावेजों की जांच की जाती है। पूरी प्रक्रिया के बाद ही नाम हटाने पर फैसला लिया जाता है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी। अनबु कुमार ने स्पष्ट किया है कि फॉर्म- 7 पर आपत्ति दर्ज होने भर से किसी मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया जाता। उन्होंने यह भी कहा कि फर्जी जानकारी या गलत घोषणा देने वाले आवेदकों के खिलाफ जांच के बाद तय प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। शिवकुमार ने कहा कि सरकार किसी भी मतदाता का मतदान का अधिकार नहीं छिनने देगी। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विचारधारा से अलग सभी मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का भी समर्थन किया। शिवकुमार ने कहा कि मतदाता अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाना विपक्ष का अधिकार है। उन्होंने दावा किया कि अलंद और महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्रों में कथित गड़बड़ी का मुद्दा राहुल गांधी और खरगे ने उठाया था। मुख्यमंत्री ने भालकी और बाबलेश्वर विधानसभा क्षेत्रों का भी जिक्र किया और दावा किया कि वहां भाजपा नेताओं ने फॉर्म जमा करने की बात स्वीकार की है। उन्होंने बेलगावी और मैसूर में भी इसी तरह की शिकायतें सामने आने का दावा किया। दूसरी ओर, भाजपा नेताओं ने शिवकुमार के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में फॉर्म जमा करना प्रतिबंधित नहीं है और इन आवेदनों की जांच करना चुनाव अधिकारियों की जिम्मेदारी है। विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान चार अक्टूबर तक राज्य में 91,278 फॉर्म आवेदन मिले थे। शिवकुमार ने मंगलवार को बेंगलुरु में पत्रकारों से कहा कि विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा और जद (एस) कार्यकर्ताओं को बड़ी संख्या में पहले से भरे हुए फॉर्म-7 दिए गए थे। उनके अनुसार, कुछ जगहों पर कार्यकर्ताओं को 500 से लेकर 3,000 तक फॉर्म दिए गए। इन फॉर्म के जरिए मतदाताओं के नाम हटाने पर आपत्तियां दर्ज की गई थीं। शिवकुमार ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के कार्यालय जाने के बाद कुछ कार्यकर्ता बूथ लेवल अधिकारियों के पास वापस पहुंचे और बड़ी संख्या में जमा फॉर्म वापस ले लिए। उन्होंने दावा किया कि एक लाख से ज्यादा फॉर्म वापस लिए गए और कुछ को जला दिया गया।



