मातृशक्तियों और युवाओं ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा
विश्व मांगल्य सभा, अवध प्रांत की ओर से पितृपक्ष के अवसर पर बिसवाँ नगर में पूर्वजों के सम्मान एवं उनकी स्मृतियों के संरक्षण का एक अनूठा कार्यक्रम आयोजित किया गया। हिन्द सागर प्रलोका सम्वाददाता अनीता लोहानी सीतापुर के नेतृत्व में हुए इस आयोजन में नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध विरासत और पूर्वजों के महत्वपूर्ण योगदान से जोड़ने का सार्थक प्रयास किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना और उन्हें अपनी सांस्कृतिक धरोहर के प्रति जागरूक करना रहा। इस आयोजन के तहत बिसवाँ बड़े चौराहे पर स्थित पूर्व सांसद जगन्नाथ प्रसाद अग्रवाल ‘जगन बाबू’ की प्रतिमा स्थल की विशेष सफाई की गई। इसके बाद, श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए धूप और पुष्प चढ़ाकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। यह कार्य न केवल एक श्रद्धांजलि थी, बल्कि पूर्वजों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक प्रतीकात्मक तरीका भी था, जिसने उपस्थित लोगों को अपनी संस्कृति से जुड़ने की प्रेरणा दी। इसी क्रम में, सामुदायिक केंद्र में श्रद्धेय गया प्रसाद मल्होत्रा की प्रतिमा को भी स्वच्छता के मानकों के अनुसार साफ किया गया। इसके उपरांत, पुष्पांजलि अर्पित कर उनके सामाजिक योगदान को स्मरण किया गया। मल्होत्रा जी के कार्यों और समाज के प्रति उनके समर्पण को याद करते हुए, उपस्थित लोगों ने उनके योगदान को एक प्रेरणा के रूप में स्वीकार किया। कार्यक्रम में मातृशक्तियों की एक बड़ी संख्या ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। उषा गुप्ता, तारा वर्मा, रोली सक्सेना, हिमानी जी जैसी जानी-मानी हस्तियों के साथ-साथ जगन बाबू के परिवार से मनीषा जी और शिवानी जी भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया और यह दर्शाया कि कैसे विभिन्न पीढ़ियाँ और सामाजिक वर्ग सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के लिए एक साथ आ सकते हैं। अवध प्रांत सदाचार सभा की संयोजिका प्रतिभा बालियान ने मातृशक्तियों के साथ मिलकर बिसवाँ शुगर फैक्ट्री स्थित हनुमान मंदिर में एक महत्वपूर्ण संवाद सत्र का आयोजन किया। इस सत्र में पितृपक्ष के वैज्ञानिक और सामाजिक महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई। बालियान ने बताया कि कैसे पितृपक्ष केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि इसके गहरे वैज्ञानिक और सामाजिक आधार भी हैं, जो हमें अपने पूर्वजों से जोड़ते हैं। इस संवाद में पितृपक्ष के वैज्ञानिक पहलुओं को उजागर किया गया, जिसमें मौसम परिवर्तन, खान-पान और स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव शामिल थे। प्रतिभा बालियान ने समझाया कि कैसे इस अवधि में विशेष आहार और जीवनशैली अपनाने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को लाभ मिलता है। यह चर्चा नई पीढ़ी के लिए विशेष रूप से ज्ञानवर्धक रही, जिन्होंने इन वैज्ञानिक तथ्यों को पहली बार जाना। सामाजिक महत्व पर जोर देते हुए, बालियान ने बताया कि पितृपक्ष परिवार के सदस्यों के बीच संबंधों को मजबूत करने का एक अवसर प्रदान करता है। यह हमें अपने पूर्वजों के बलिदानों और योगदानों को याद करने और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का मौका देता है। यह परंपरा सामाजिक समरसता और पारिवारिक एकता को बढ़ावा देती है। उन्होंने कहा कि पूर्वजों को नमन करना केवल एक रस्म नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने और उसे अगली पीढ़ियों तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम है। यह हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखता है और हमें अपनी विरासत पर गर्व करना सिखाता है। इस प्रकार के आयोजन समाज में सकारात्मकता और जुड़ाव की भावना पैदा करते हैं। कार्यक्रम के आयोजकों ने नई पीढ़ी से आह्वान किया कि वे अपनी संस्कृति और पूर्वजों के योगदान को महत्व दें। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में भी हमें अपनी जड़ों को नहीं भूलना चाहिए। अपनी विरासत का सम्मान करना और उसे संरक्षित रखना हम सभी का सामूहिक कर्तव्य है। यह आयोजन बिसवाँ नगर में एक यादगार स्मृति बन गया, जिसने न केवल पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित की, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने के लिए प्रेरित भी किया। इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में संस्कारों और परंपराओं के महत्व को रेखांकित करते हैं।




