समाचार
Opening page
Preparing your workspace...
ताइवान जलड़मरूमध्य में एक बार फिर तनाव गहरा गया है, जब ताइवान के तटरक्षक बल ने अपनी समुद्री सीमा में घुसपैठ कर रही एक चीनी बोट पर जल तोप (वॉटर कैनन) से हमला कर दिया। बार-बार चेतावनी को नजरअंदाज करने के बाद यह कड़ी कार्रवाई की गई, जिसके बाद चीनी घुसपैठियों को जान बचाकर भागना पड़ा। यह घटना ताइवान के अधिकार क्षेत्र वाले समुद्री इलाके में हुई, जब एक चीनी मछली पकड़ने वाली नाव अवैध रूप से दाखिल हो गई। ताइवानी तटरक्षक बल ने लाउडस्पीकर पर चेतावनी देते हुए बोट को तुरंत पीछे हटने को कहा, लेकिन चीनी चालक दल ने इसे नजरअंदाज करते हुए आगे बढ़ना जारी रखा। इसके बाद ताइवान के तटरक्षकों ने बिना देरी किए बोट पर तेज दबाव वाली जल तोप से सीधा हमला कर दिया। पानी की इस प्रचंड बौछार का हमला इतना खतरनाक था कि चीनी नाव की खिड़कियां और ढांचा हिल गया, जिससे चालक दल में अफरा-तफरी मच गई और वे तुरंत ताइवानी सीमा से बाहर भाग खड़े हुए। इस सख्त कार्रवाई से ताइवान ने पूरी दुनिया को यह संदेश दिया है कि वह अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच वाशिंगटन के लिए एक बड़ा संदेश निहित है। अमेरिका और ताइवान के बीच 14 अरब डॉलर की हथियारों की डील लंबे समय से अटकी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मेगा डिफेंस पैकेज को यह सोचकर रोक रखा था कि वह इसका इस्तेमाल चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ व्यापारिक बातचीत में एक मोलभाव के मोहरे की तरह करेंगे। ट्रंप का गणित यह था कि हथियार रोककर वह चीन को खुश रखेंगे और ताइवान को भी अपने इशारों पर नचाएंगे, क्योंकि उन्हें लगता था कि चीन और ताइवान के बीच कोई युद्ध नहीं होगा। ताइवान ने दिखा दिया कि भले ही अमेरिका उसे हथियार देने में देरी करे, वह अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिकी हरी झंडी का इंतजार नहीं करेगा। जैसे-जैसे वाशिंगटन और बीजिंग के बीच बैकडोर कूटनीति तेज हुई है, ऐसा लगा कि अमेरिका ने ताइवान पर चीन के आक्रमण के जोखिम को कम आंकना शुरू कर दिया है। पहले जहां शी जिनपिंग ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को 2027 तक ताइवान पर सैन्य कब्जे के लिए तैयार रहने का अल्टीमेटम दिया था, वहीं अब अमेरिकी खुफिया विभाग का मानना है कि चीन 2028 से पहले ऐसा कोई हमला नहीं करेगा।
इस खबर पर आपकी प्रतिक्रिया