बेंगलुरु पुलिस का पांच कमिश्नरेट में पुनर्गठन होगा
कानून व्यवस्था मजबूत होगी
कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु शहर पुलिस के पुनर्गठन का एक बड़ा फैसला लिया है। राज्य मंत्रिमंडल ने शहर पुलिस को पांच अलग-अलग कमिश्नरेट में बांटने की मंजूरी दे दी है। इस कदम का उद्देश्य कानून व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और सार्वजनिक सुरक्षा को मजबूत करना है। इस पुनर्गठन के लिए लगभग 6,550 अतिरिक्त पदों की आवश्यकता होगी। मौजूदा बेंगलुरु शहर पुलिस कमिश्नरेट को पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण और मध्य नामक पांच अलग-अलग पुलिस कमिश्नरेट में पुनर्गठित किया जाएगा। इन सभी के समग्र पर्यवेक्षण के लिए एक मुख्य पुलिस आयुक्त का पद होगा। पुलिस आयुक्त के मौजूदा पद को उन्नत कर मुख्य पुलिस आयुक्त का पदनाम दिया जाएगा। यातायात के संयुक्त या अतिरिक्त पुलिस आयुक्त के पद को पुलिस आयुक्त (यातायात) के पदनाम से जाना जाएगा। इस पुनर्गठन के लिए वित्त विभाग ने 1,022 नए पदों के सृजन की सहमति दे दी है। मंत्रिमंडल ने भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद, नए पुलिस स्टेशनों की स्थापना और कर्मियों की तैनाती चरणों में की जाएगी। इस पूरी व्यवस्था के लिए इमारतों, वाहनों, उपकरणों, सीसीटीवी सिस्टम और अन्य बुनियादी ढांचे के लिए एकमुश्त गैर-आवर्ती व्यय के रूप में 396.16 करोड़ रुपये का अनुमान लगाया गया है। कुल मिलाकर, इस पुनर्गठन के लिए अनुमानित व्यय 764.87 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है। हालांकि, विपक्ष के नेता आर. अशोक ने इस कदम का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि सालों से चली आ रही व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय इसे पांच कमिश्नरेट में क्यों बांटा जा रहा है। अशोक ने कहा कि इससे पुलिस व्यवस्था और अधिक भ्रमित हो जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि बेंगलुरु पहले से ही पांच निगमों में बंटा हुआ है और प्रशासनिक व वित्तीय समस्याओं का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग को इसी तरह बांटकर सरकार एक और गड़बड़ी पैदा कर रही है। यह बेंगलुरु पुलिस के इतिहास में एक काला अध्याय बन जाएगा। वरिष्ठ अधिकारी भी इस फैसले को लेकर चिंता व्यक्त कर रहे हैं। उनका मानना है कि इससे पुलिसिंग की प्रभावशीलता पर असर पड़ सकता है।
यह पुनर्गठन बेंगलुरु शहर में बढ़ते अपराधों और यातायात की भीड़ को देखते हुए किया जा रहा है। उम्मीद है कि पांच अलग-अलग कमिश्नरेट बनने से इन समस्याओं से निपटने में मदद मिलेगी। नए पुलिस स्टेशनों की स्थापना और 276 नए पदों के सृजन के साथ, शहर के बाहरी इलाकों में भी पुलिस की मौजूदगी बढ़ेगी। इस पुनर्गठन के लिए कुल 6,550 अतिरिक्त पदों की आवश्यकता होगी, जिनमें अपराध, यातायात और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े मामले शामिल होंगे।
नए कमिश्नरेट बनने से पुलिस की पहुंच भी बढ़ेगी। इसका सीधा फायदा आम जनता को मिलेगा। हालांकि, कुछ लोगों ने इस फैसले पर चिंता जताई है। मानना है कि इससे व्यवस्था और जटिल हो सकती है। आगे की प्रक्रिया में भर्ती और तैनाती शामिल होगी।






