देश भर के सरकारी स्कूलों के शिक्षक वोटर लिस्ट सुधार कार्य में लगे हैं, जिससे उनकी नियमित कक्षाएं प्रभावित हो रही हैं। मुंबई के एक स्कूल में 34 में से 24 शिक्षक बीएलओ ड्यूटी पर हैं। कर्नाटक जैसे राज्यों में छात्र मिड-टर्म परीक्षाओं में खराब प्रदर्शन कर रहे हैं, क्योंकि शिक्षकों की अनुपस्थिति के कारण पढ़ाई बाधित हुई है। शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षकों की कमी जैसी मौजूदा चुनौतियों के बीच यह स्थिति चिंताजनक है, जबकि चुनाव आयोग ने नए वोटरों को शामिल करने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं
देश भर में वोटर लिस्टों में संशोधन के लिए चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) के कार्य को लेकर शिक्षा जगत में चिंता बढ़ रही है। यह कार्य, जो लोकतंत्र में पारदर्शिता के लिए महत्वपूर्ण है, शिक्षकों पर भारी बोझ डाल रहा है। 'शिक्षा के अधिकार अधिनियम' की धारा 27 शिक्षकों को पढ़ाई-लिखाई के अलावा अन्य कामों में लगाने से रोकती है, हालांकि कुछ खास परिस्थितियों में चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कामों की इजाजत है। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी इस कार्य को शिक्षकों पर असहनीय बोझ न बनने देने पर जोर दिया है। मुंबई के एक स्कूल के 34 शिक्षकों में से 24 शिक्षक बीएलओ की ड्यूटी कर रहे हैं।



