कान्हा टाइगर रिजर्व के मुक्की परिक्षेत्र में एक मादा बाघ शावक की मौत हो गई। उसे करीब डेढ़ माह पहले वन क्षेत्र में अकेले और अत्यंत कमजोर अवस्था में पाया गया था। वन विभाग के गश्ती दल ने 26 अगस्त को शावक को गंभीर रूप से बीमार हालत में देखा था, जिसके बाद उसे बचाकर उपचार केंद्र लाया गया। 27 अगस्त से वन्य प्राणी चिकित्सा विशेषज्ञों की देखरेख में उसका इलाज चल रहा था। उपचार के बावजूद, शावक की हालत में सुधार नहीं हुआ और 6 अक्टूबर को उसने दम तोड़ दिया। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत, मृत्यु के बाद 7 अक्टूबर को शव परीक्षण किया गया। यह पोस्टमार्टम कान्हा टाइगर रिजर्व के वन्य प्राणी चिकित्सा अधिकारी और बैहर के पशु चिकित्सक ने संयुक्त रूप से किया। शव परीक्षण के दौरान, आवश्यक शारीरिक अंगों और जैविक नमूनों को जबलपुर स्थित प्रयोगशाला में फोरेंसिक और पैथोलॉजिकल जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही बाघ शावक की मृत्यु के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा। इस प्रक्रिया के तहत शवदाह की कार्रवाई भी पूरी कर ली गई है। शव परीक्षण और शवदाह के समय कान्हा टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक, उपसंचालक (कोर), सहायक संचालक (हालोन), मुक्की परिक्षेत्र अधिकारी, एनटीसीए प्रतिनिधि रंजीत सत्रसुलय, स्थानीय जनप्रतिनिधि और वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। शावक को वन क्षेत्र में पहली बार अकेले और कमजोर पाए जाने के बाद से ही उसके स्वास्थ्य सुधार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे। वन विभाग ने बाघ शावक के जीवन की रक्षा और उसके स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए विशेष प्रयास किए थे।
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कान्हा में बाघिन की मौत, जांच जारी
8 अक्टूबर 2026 को 12:19 am बजे

कान्हा में बाघिन की मौत, जांच जारी



