जम्मू-कश्मीर के कठुआ में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के एक जवान द्वारा अपने चार साथियों की हत्या की घटना ने सुरक्षा बलों के भीतर पनप रहे तनाव और असंतोष की गंभीर तस्वीर पेश की है। यह दुखद वारदात बताती है कि देश के महत्वपूर्ण ढांचों की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले बल भी आंतरिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं। सीआईएसएफ के हेड कॉन्स्टेबल ने कथित तौर पर कार्यस्थल पर हुई एक मामूली बहस के बाद अपनी सर्विस एके-47 से गोलीबारी कर इस घटना को अंजाम दिया। यह घटना न केवल जवानों की सुरक्षा पर सवाल उठाती है, बल्कि सुरक्षा बलों के भीतर मौजूद समस्याओं के समाधान के लिए एक प्रभावी तंत्र की तत्काल आवश्यकता को भी रेखांकित करती है
जम्मू-कश्मीर के कठुआ में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के एक जवान द्वारा अपने चार साथियों की हत्या की घटना ने सुरक्षा बलों के भीतर पनप रहे तनाव और असंतोष की गंभीर तस्वीर पेश की है। यह दुखद वारदात बताती है कि देश के महत्वपूर्ण ढांचों की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले बल भी आंतरिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं। सीआईएसएफ के हेड कॉन्स्टेबल ने कथित तौर पर कार्यस्थल पर हुई एक मामूली बहस के बाद अपनी सर्विस एके- 47 से गोलीबारी कर इस घटना को अंजाम दिया। यह घटना न केवल जवानों की सुरक्षा पर सवाल उठाती है, बल्कि सुरक्षा बलों के भीतर मौजूद समस्याओं के समाधान के लिए एक प्रभावी तंत्र की तत्काल आवश्यकता को भी रेखांकित करती है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि हर छोटा विवाद हिंसक रूप नहीं लेता, लेकिन ऐसे संकेत मिलते ही उन पर समय रहते ध्यान देना आवश्यक है ताकि अनहोनी को टाला जा सके। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में जवानों की शिकायतों के समाधान के लिए एक असरदार निगरानी और प्रभावी तंत्र की नितांत आवश्यकता है। विगत में गृह मंत्रालय की एक टास्क फोर्स ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल में जवानों द्वारा अपने साथियों की हत्या के मुख्य कारणों की पहचान की थी। इसमें कठोर सेवा शर्तें, परिवार में आपात स्थिति के समय छुट्टी मिलने में देरी, आलोचना, उत्पीड़न पर प्रतिक्रिया और साथियों के अनुचित व्यवहार को हिंसक प्रतिक्रियाओं के प्रमुख कारण बताया गया था। दूर- दराज के इलाकों में तैनात जवानों को लंबी और अनियमित ड्यूटी, परिवार से जुड़ी मुश्किलों तथा घर से लंबे समय तक दूर रहने जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।



