यह शिक्षकों के प्रति सम्मान और उनके समर्पण को स्वीकार करने का एक तरीका था।
वनबंधु परिषद महिला समिति, बेंगलौर ने 6 अक्टूबर को रत्नापुरी संच के दो एकल विद्यालयों का भ्रमण किया। इस वनयात्रा में वनबंधु परिषद साउथ जोन सेक्रेटरी विमल जी सरावगी, राष्ट्रीय समिति सचिव रेनू जी कनोडिया, संगठन मंत्री सरिता जी भंसाली, समिति अध्यक्ष कांता जी काबरा, सचिव अनीता जैन और वनयात्रा प्रभारी नीरू जी तयाल सहित 21 सदस्य और 6 अतिथि शामिल हुए। विशेष अतिथि रेशु जी सरावगी थीं, जिन्होंने 30 सितंबर को 'द जर्नी ऑफ़ वूमेनहुड' पर एक ऑनलाइन सत्र लिया था। वे अपने पुत्र क्षितिज बांका और भतीजे आर्यमान सरावगी के साथ वनयात्रा में शामिल हुईं, क्योंकि वे एकल विद्यालयों के कार्य से बहुत प्रभावित थीं। वनयात्रा का मुख्य उद्देश्य ऐसे क्षेत्रों में जाना था जहाँ पहले ऐसी यात्राएँ नहीं हुई हों। इससे समिति के सदस्यों को आचार्यों और बच्चों से सीधे संवाद करने, विद्यालयों की कार्यप्रणाली, शैक्षणिक गतिविधियों और बच्चों के विकास को समझने का अवसर मिला। यात्रा के दौरान, बच्चों ने पारंपरिक तरीके से अतिथियों का स्वागत किया और श्लोक तथा देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए। वनयात्रा का सबसे खास आकर्षण क्षितिज बांका और आर्यमान सरावगी द्वारा आयोजित विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (स्टीम) सत्र रहा। क्षितिज, जो ब्रेनस्टेम के संस्थापक और कक्षा 11 के छात्र हैं, तथा आर्यमान, जो एक्सपी रोबोटिक्स के सह-संस्थापक और कक्षा 12 के छात्र हैं, ने बच्चों को रोचक और प्रयोगात्मक गतिविधियों से विज्ञान सिखाया। दोनों युवा छात्रों ने सरल विज्ञान प्रयोगों और संवादात्मक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को अवलोकन करने, प्रयोग करने और सबसे महत्वपूर्ण 'क्यों? ' पूछने के लिए प्रेरित किया। इस पहल का मूल उद्देश्य बच्चों में जिज्ञासा और वैज्ञानिक सोच विकसित करना है। इस पहल के पीछे का विचार यह है कि बच्चे अपने गाँव और समुदाय की समस्याओं को पहचान सकें और उनके रचनात्मक समाधान खोजने की दिशा में सोच सकें। क्षितिज और आर्यमान इस प्रयास को अधिक से अधिक एकल विद्यालयों तक पहुँचाना चाहते हैं, ताकि ग्रामीण भारत के बच्चों को भी प्रयोग-आधारित और आनंददायक विज्ञान शिक्षा मिल सके। समिति सदस्यों ने बच्चों को नवरात्रि पर्व की संक्षिप्त जानकारी दी और सामूहिक गरबा नृत्य का आयोजन किया, जिसमें डांडिया भी शामिल था। बच्चों को टी-शर्ट, पैंट, बेल्ट, टोपी, मोजे, पेन, पुस्तकें, चिक्की, सेब और कन्नड़ भाषा में हनुमान चालीसा की पुस्तक जैसे उपहार सामग्री के पैकेट वितरित किए गए। इसके अतिरिक्त, कन्या पूजन कर बालिकाओं को बिंदी, मेहंदी, नेल पॉलिश और हेयर क्लिप की सामग्री भी भेंट की गई। आचार्यों के घरों पर जाकर उन्हें भी उपहार दिए गए। अतिथियों को डोनर्स बोर्ड और वनबंधु परिषद के विभिन्न कार्यों की जानकारी दी गई। वनयात्रा के दौरान, सभी प्रतिभागियों का आपसी परिचय कराया गया। वनबंधु परिषद की कार्यप्रणाली और एकल विद्यालयों के माध्यम से किए जा रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी साझा की गई। अतिथियों द्वारा पूछे गए जिज्ञासापूर्ण प्रश्नों के उत्तर भी दिए गए। यात्रा के दौरान रेशु जी को दुपट्टा, स्मृति-चिह्न और पौधा भेंट कर सम्मानित किया गया। उन्होंने बच्चों के सीखने के उत्साह और समिति के प्रयासों की सराहना की। वापसी के मार्ग में, सभी प्रतिभागियों ने लगभग 200 वर्ष पुराने एक सुंदर शिव मंदिर के दर्शन किए। वहीं पर सभी ने दोपहर के भोजन का आनंद लिया, जो यात्रा का एक सुखद अनुभव रहा।






