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मतदाता सूची में नामों को लेकर कर्नाटक में भाजपा और राज्य सरकार के बीच विवाद गहरा गया है। फॉर्म-7 के तहत दर्ज आपत्तियों पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर भाजपा ने सरकार पर निशाना साधा है। वरिष्ठ भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा ने चेतावनी दी है कि यदि पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिसिया कार्रवाई जारी रही तो भाजपा राज्यव्यापी आंदोलन करेगी। उन्होंने कहा कि किसी भी सूरत में कार्यकर्ताओं पर अनुचित कानूनी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। गिरफ्तारी, उत्पीड़न और मारपीट के आरोपों पर भी उन्होंने आपत्ति जताई है। येदियुरप्पा ने गुरुवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर प्रदर्शन को लेकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से सीईओ पर दबाव बनाने की कोशिश की। हालांकि, उपमुख्यमंत्री जी। परमेश्वर ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री और अन्य नेता वहां प्रदर्शन करने नहीं, बल्कि ज्ञापन सौंपने गए थे। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने भी पुलिस पर सरकार के दबाव में काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ लगातार एफआईआर दर्ज की गईं तो भाजपा और कड़ा विरोध करेगी। उन्होंने पुलिस थानों के सामने धरना और घेराव करने की चेतावनी भी दी। विवाद के बीच भाजपा नेताओं ने पुलिस कार्रवाई पर रोक लगाने और फॉर्म-7 से जुड़े मामलों की जांच चुनाव आयोग की प्रक्रिया के तहत कराने की मांग की है। विपक्ष के नेता आर। अशोक ने कहा कि फॉर्म-7 दाखिल करना अपने आप में अपराध नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी मतदाता के नाम और उसकी वैधता को लेकर सच्चाई तय करने का अधिकार चुनाव आयोग का है, पुलिस थाने का नहीं। भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने डीजीपी एमए सलीम से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और पुलिस से कानून के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि फॉर्म-7 दाखिल करना अपने आप में कोई अपराध नहीं है और मतदाताओं के नाम तथा उनकी वैधता को लेकर सच्चाई तय करने का अधिकार चुनाव आयोग का है, न कि पुलिस थाने का। यह विवाद तब बढ़ा जब भाजपा ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से कथित तौर पर हटाए गए नामों के संबंध में फॉर्म-7 के तहत आपत्तियां दर्ज कराने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की जा रही है। भाजपा का कहना है कि यह कार्रवाई सत्ताधारी दल के इशारे पर हो रही है, जिसका उद्देश्य आगामी चुनावों से पहले मतदाताओं को डराना और चुप कराना है। वहीं, राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए उपमुख्यमंत्री जी। परमेश्वर ने भाजपा के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और अन्य कांग्रेस नेता प्रदर्शन करने नहीं, बल्कि ज्ञापन सौंपने सीईओ कार्यालय गए थे। परमेश्वर ने यह भी कहा कि मतदाता सूची से संबंधित सभी मामले चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार ही निपटाए जा रहे हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता बीएस येदियुरप्पा ने पुलिस कार्रवाई को तानाशाही करार दिया। उन्होंने डीजीपी से मुलाकात के दौरान कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ किसी भी तरह की ज्यादती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने मांग की कि पुलिस तत्काल प्रभाव से ऐसी कार्रवाइयों पर रोक लगाए और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करे। अशोक ने इस मुद्दे पर भाजपा का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि फॉर्म-7 का उपयोग करना एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसे अपराध नहीं माना जा सकता। दोनों पक्षों के बीच यह टकराव राज्य की राजनीति में गरमाहट बढ़ा रहा है।
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