केंद्रीय कर बेंगलुरु अंचल में राजभाषा सम्मेलन
केंद्रीय कर एवं सीमा शुल्क, बेंगलुरु अंचल में 6 अक्टूबर 2026 को राजभाषा सम्मेलन एवं हिंदी पखवाड़ा समापन समारोह आयोजित किया गया। बेंगलुरु में 8 अक्टूबर को हुए इस कार्यक्रम में कार्यालयीन कार्यों में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग, भारतीय भाषाओं के महत्व तथा आधुनिक तकनीकी उपकरणों के माध्यम से राजभाषा के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया गया। समारोह का शुभारंभ राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन से हुआ। इसके बाद स्वागत भाषण और केंद्रीय गृह मंत्री के संदेश का वाचन किया गया। समारोह में केंद्रीय कर एवं सीमा शुल्क, बेंगलुरु अंचल के मुख्य आयुक्त आशीष चंदन, केंद्रीय कर की मुख्य आयुक्त काजल सिंह, मुख्य आयुक्त करन वर्मा तथा मुख्य अतिथि मैथिल पी। राव ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। मुख्य अतिथि मैथिल पी। राव ने अपने संबोधन में कन्नड़ और हिंदी के बीच समानताओं तथा दोनों भाषाओं की सांस्कृतिक निकटता पर प्रकाश डालते हुए हिंदी की समृद्ध धरोहर और महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। अध्यक्षीय संबोधन में मुख्य आयुक्त आशीष चंदन ने सभी भारतीय भाषाओं के महत्व को रेखांकित करते हुए कार्यालयीन कार्यों में राजभाषा के अधिकाधिक प्रयोग का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हिंदी को बढ़ावा देना किसी भी अन्य भारतीय भाषा को कमतर आंकना नहीं है, बल्कि यह देश की विविध भाषाई विरासत का सम्मान करते हुए राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का एक प्रयास है। चंदन ने कहा कि सरकारी कामकाज में हिंदी का प्रयोग बढ़ाने से विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के बीच संवाद सुगम होगा और राष्ट्र निर्माण में उनकी भागीदारी बढ़ेगी। वहीं मुख्य आयुक्त काजल सिंह ने भारत सरकार द्वारा राजभाषा कार्यान्वयन के लिए विकसित किए जा रहे ‘भारती’, ‘कंठस्थ’ और ‘अनुवादिनी’ जैसे तकनीकी उपकरणों के नए संस्करणों तथा ई-ऑफिस के साथ इनके उपयोग की संभावनाओं पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि ये उपकरण राजभाषा हिंदी के प्रयोग को न केवल सरल बनाएंगे, बल्कि इसकी सटीकता और प्रभावशीलता को भी बढ़ाएंगे। काजल सिंह ने कहा कि प्रौद्योगिकी के इस युग में, हमें अपनी भाषाओं को जीवित रखने और उन्हें आधुनिक बनाने के लिए ऐसे उपकरणों का भरपूर उपयोग करना चाहिए। समारोह का एक महत्वपूर्ण आकर्षण विभागीय गृह पत्रिका ‘वृंदावन’ का विमोचन रहा। इस पत्रिका में विभिन्न अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा लिखी गई विविध रचनाएं प्रकाशित की गई थीं, जिनकी समारोह में विशेष रूप से सराहना की गई। पत्रिका ने न केवल साहित्यिक प्रतिभा को मंच प्रदान किया, बल्कि कार्यालय की गतिविधियों और उपलब्धियों को भी साझा किया। ‘वृंदावन’ के विमोचन से उपस्थित लोगों में उत्साह का संचार हुआ। सहायक निदेशक (राजभाषा) अनुश्री पीएस ने राजभाषा हिंदी के क्रियान्वयन संबंधी रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में कार्यालयीन कामकाज में हिंदी के प्रयोग में वृद्धि हुई है, लेकिन अभी भी और अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है। अनुश्री पीएस ने विभिन्न अनुभागों द्वारा हिंदी के प्रयोग में दिखाई गई सक्रियता के लिए उनकी सराहना की और भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया। हिंदी पखवाड़ा समापन समारोह के दौरान अधिकारियों ने कविता पाठ और हिंदी गीतों की प्रस्तुति देकर वातावरण को साहित्यिक एवं सांस्कृतिक रंग दिया। उन्होंने राष्ट्रगान के साथ समारोह के समापन की घोषणा की।




