विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि दुनिया इस समय बदलाव और उथल- पुथल के दौर में प्रवेश कर रही है। दिल्ली में आयोजित पांचवें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन के समापन सत्र में संवाद के दौरान उन्होंने कहा कि आने वाला समय अनिश्चितताओं से भरा हो सकता है। दुनिया दो बड़े संघर्षों का सामना कर रही है और इसके अलावा भी कई तरह के तनाव मौजूद हैं। गैर-बाजार कारकों का दबाव और शुल्कों में अस्थिरता भी वैश्विक परिस्थितियों को प्रभावित कर रही है। जयशंकर ने कहा कि इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए यह मुश्किल दौर है। जयशंकर ने भारत के पिछले अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने कई बड़ी चुनौतियों का सामना किया है। कोविड महामारी हो या मौजूदा समय में एक साथ सामने आई दो संघर्षों की चुनौती, भारत ने परिस्थितियों के अनुरूप खुद को संभाला है। उन्होंने कहा कि भारत की ऊर्जा, खाद्य और उर्वरक जैसी जरूरतों का भी उन्होंने जिक्र किया। इन सभी चुनौतियों को भारत को अपनी सोच, योजना और प्रतिक्रिया का हिस्सा बनाना होगा। यही इस समय देश के सामने मौजूद मुख्य जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर भारत का मानना है कि आगे बढ़ने का रास्ता संवाद और कूटनीति से होकर जाता है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में गतिरोध बना हुआ है और कुछ देश इन संस्थाओं में सुधार का विरोध कर रहे हैं। संघर्षों और टैरिफ में अस्थिरता के कारण वैश्विक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं।
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आने वाला समय उथल-पुथल भरा हो सकता है: जयशंकर
6 अक्टूबर 2026 को 12:32 am बजे



