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दुनिया इस समय बेहद ताकतवर अल नीनो का सामना कर रही है, जिसे मौसम विशेषज्ञ 'सुपर-डुपर अल नीनो' कह रहे हैं। प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र का तापमान सामान्य से 3। इस अभूतपूर्व स्थिति के कारण दुनिया के कई हिस्सों में अत्यधिक गर्मी, सूखा या भारी बारिश की आशंका है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने बारिश के पैटर्न में बड़े बदलावों से कई इलाकों में सूखा और बाढ़ का खतरा बढ़ने की चेतावनी दी है। अल नीनो का असर भारत में भी दिखाई दे रहा है, जहाँ 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से 13% कम बारिश के साथ समाप्त हुआ। यह 2001 के बाद भारत का चौथा सबसे सूखा मानसून रहा, जिसके दूसरे हिस्से में अल नीनो का प्रभाव स्पष्ट देखा गया। अल नीनो सिर्फ प्रशांत महासागर में होने वाली एक खास प्राकृतिक प्रक्रिया है। सामान्य स्थिति में, प्रशांत महासागर की हवाएं पूर्व से पश्चिम की ओर चलती हैं, जो गर्म पानी को इंडोनेशिया-ऑस्ट्रेलिया की तरफ धकेलती हैं। इस दौरान, दक्षिण अमेरिका के पास समुद्र की गहराई से ठंडा पानी सतह पर आता रहता है। लेकिन अल नीनो के दौरान, ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं। इसके परिणामस्वरूप, पश्चिम में जमा हुआ गर्म पानी पूर्व की ओर फैलने लगता है, जिससे प्रशांत महासागर का मध्य और पूर्वी हिस्सा सामान्य से काफी अधिक गर्म हो जाता है। दूसरे महासागरों में भी तापमान बदलता है, लेकिन वहां हवाओं और समुद्र के पानी की ऐसी विशेष व्यवस्था नहीं होती, इसलिए उन्हें अल नीनो नहीं कहा जाता। इस 'सुपर-डुपर अल नीनो' के कारण जून 2026 से फरवरी 2027 के बीच दुनियाभर में करीब 4.51 लाख अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं। शिकागो यूनिवर्सिटी के क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के शोधकर्ताओं के मुताबिक, ज्यादा गर्मी से हीट स्ट्रोक और दूसरी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा, बारिश के पैटर्न में बड़े बदलावों से कहीं पानी की भारी कमी तो कहीं विनाशकारी बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है। मौसम में आए इस बदलाव के कारण उत्तर प्रदेश के 42 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।
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