विमान में आतंकी हमला रोकने वाले भारतीय पायलट स्मित मच्छर की बहादुरी पर कई विपक्षी नेताओं ने चुप्पी साध ली है। यह मौन मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति का परिणाम है, जो आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को कमजोर करता है। स्मित मच्छर ने अपनी सूझबूझ और साहस से न केवल 9/11 यात्रियों की जान बचाई, बल्कि एक बड़े आतंकी हमले को भी नाकाम कर दिया। यह घटना दर्शाती है कि कैसे कुछ तत्व आतंकवाद को अनदेखा कर या उसे गलत रंग देकर अपनी संकीर्ण राजनीति साधने की कोशिश करते हैं। स्मित मच्छर की इस कार्रवाई को 'फाल्स फ्लैग ऑपरेशन' बताकर दुष्प्रचार करने वाले लोग असल में आतंकवाद के मददगार साबित हो रहे हैं। यह कोई नई बात नहीं है। पहले भी 9/11 और 26/11 जैसी घटनाओं को लेकर भी ऐसे ही तर्क गढ़े गए थे। यहां तक कि पहलगाम हमले को भी भारत का 'फाल्स फ्लैग ऑपरेशन' बताकर पाकिस्तान ने दुष्प्रचार किया था। ऐसे तत्व न केवल आतंकवाद का बचाव करते हैं, बल्कि उससे लड़ने वालों के रास्ते में बाधा भी डालते हैं। वे कई बार आतंकियों को पीड़ित का रहनुमा बताकर उनका गुणगान करने से भी नहीं हिचकते। आतंकवाद से लड़ना इसलिए भी कठिन हो गया है क्योंकि कुछ लोग आतंकियों की हरकतों और उनसे लड़ने वालों पर मौन रहना पसंद करते हैं। विमान में आतंकी हमला रोकने वाले स्मित मच्छर की बहादुरी पर विपक्ष के अनेक कथित सेक्युलर नेताओं ने एक शब्द भी कहने की जरूरत नहीं समझी। उनके मौन पर सवाल उठने के बावजूद वे चुप ही रहे। इसके पीछे मुस्लिम वोट बैंक की वह संकीर्ण राजनीति है, जो इजरायल को शत्रु मानती है और हमास जैसे संगठनों की तारीफ करने में संकोच नहीं करती। इसलिए, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में मौन या दुष्प्रचार कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
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पायलट की बहादुरी पर चुप्पी: वोट बैंक की राजनीति आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में बाधक
8 अक्टूबर 2026 को 11:58 pm बजे

पायलट की बहादुरी पर चुप्पी: वोट बैंक की राजनीति आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में बाधक
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