अमेरिका ने इंग्लैंड के आरएएफ फेयरफोर्ड एयरबेस से अपने सभी बमवर्षक विमान हटा लिए हैं। यह कदम आरएएफ फेयरफोर्ड एयरबेस पर कथित आतंकी हमले की साजिश की जांच के बाद उठाया गया है। पेंटागन के एक अधिकारी ने रविवार को अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर यह जानकारी दी। अधिकारी के मुताबिक, बमवर्षक विमानों को अमेरिका में उनके अपने ठिकानों पर वापस भेज दिया गया है। मिलिट्री एयर ट्रैकिंग अलायंस जैसे विमानन गतिविधियों पर नजर रखने वाले समूहों ने ईरान युद्ध शुरू होने के शुरुआती दिनों से आरएएफ फेयरफोर्ड से दर्जनों बी-52 और बी-1 बमवर्षकों को उड़ान भरते देखा है। निगरानी करने वालों ने रविवार को कई बी-1 बमवर्षकों को इस एयरबेस से उड़ान भरते देखा। यह एयरबेस अमेरिकी नियंत्रण में है और यहां से ईरान पर हमले किए गए थे। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ युद्ध को लेकर विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। व्हाइट हाउस से ओहायो में एक रैली के लिए रवाना होते समय ट्रंप ने शनिवार को पत्रकारों से कहा, ईरान को लेकर मेरे पास फैसले हैं, जो मैं करूंगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान तबाह हो चुका है और अब सवाल यह है कि यह आसान तरीका होगा या मुश्किल तरीका। पिछले हफ्ते मध्य लंदन में दोहरी ब्रिटिश-ईरानी नागरिकता वाले एक व्यक्ति को आतंकी हमले की साजिश रचने के संदेह में गिरफ्तार किया गया था। यह गिरफ्तारी सितंबर के अंत में आरएएफ फेयरफोर्ड में हुई एक सुरक्षा घटना के बाद हुई। जांच के दौरान कुल छह लोगों को हिरासत में लिया गया, जिन्हें बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया। ब्रिटिश अधिकारियों ने इस घटना को तेहरान से जोड़ा है, हालांकि ईरान ने इसमें शामिल होने से इनकार किया है। आरएएफ फेयरफोर्ड लंदन से करीब 100 मील यानी 160 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है। मध्य पूर्व में दशकों से चले आ रहे संघर्षों के दौरान अमेरिका इस एयरबेस का इस्तेमाल अपने बमवर्षक विमानों के लिए करता रहा है। यह पश्चिम एशिया में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी का एक हिस्सा है। अमेरिकी सेना की पश्चिम एशिया में अभी भी बड़ी सैन्य मौजूदगी है। गुरुवार को अमेरिका के एक अधिकारी ने बताया कि हाल ही में तैनात किया गया यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट विमानवाहक पोत भी इस क्षेत्र की ओर जा रहा है। इसके साथ यूएसएस माल्किन आइलैंड उभयचर तैयार समूह भी क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है। यह कई जहाजों का एक समूह है जिसमें कुल 7,000 से अधिक नौसैनिक और 2,000 मरीन होते हैं। अधिकारी ने कहा कि इस कदम के बाद अक्तूबर के अंत तक इस क्षेत्र में तीन विमानवाहक पोत हो सकते हैं। ट्रंप ने शुरुआत में अमेरिकी लोगों से कहा था कि यह अभियान कुछ हफ्तों तक चलेगा। आतंकी साजिश के शक में कितने लोग पकड़े गए, यह जांच का विषय है। यह घटना पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच हुई है। अमेरिका ईरान पर लगातार दबाव बनाए हुए है और उसने हाल ही में इस क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाई है। ईरान ने हालांकि किसी भी तरह की आतंकी साजिश में शामिल होने से इनकार किया है, लेकिन ब्रिटिश अधिकारियों का मानना है कि इस घटना के पीछे तेहरान का हाथ हो सकता है।
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अमेरिका ने इंग्लैंड एयरबेस से हटाए बमवर्षक विमान
6 अक्टूबर 2026 को 12:32 am बजे



