स्विस राष्ट्रपति गाइ परमेलिन की भारत यात्रा ने दोनों देशों के बीच गहरे भरोसे और आपसी सम्मान पर आधारित मजबूत संबंधों को फिर से रेखांकित किया है। परमेलिन की यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौता अनिश्चितता के अंधे मोड़ पर पहुंच गया है, जिससे आगे बढ़ना मुश्किल हो रहा है। यह विरोधाभास भारत की विविध व्यापारिक रणनीतियों को दर्शाता है। राष्ट्रपति परमेलिन 7 अक्टूबर, 2026 को होने वाले दूसरे भारत-ईएफटीए प्रॉस्पेरिटी समिट में भाग लेने के लिए भारत आए हैं। यह समिट टीईपीए (व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता) की पहली वर्षगांठ का जश्न भी मनाएगा। ईएफटीए देशों (स्विट्जरलैंड, आइसलैंड, लिकटेंस्टीन और नॉर्वे) में स्विट्जरलैंड भारत का सबसे बड़ा व्यापार और निवेश साझेदार है। इस समझौते के तहत, ईएफटीए ने भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश और 92.2 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर टैरिफ में छूट का वादा किया है। इससे इंजीनियरिंग, रसायन, कपड़ा और कृषि जैसे भारतीय निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, टीईपीए के पहले वर्ष के व्यापार के नतीजे मिले-जुले रहे हैं। वित्त वर्ष 2025 में चार ईएफटीए देशों को भारत का निर्यात 10.77 प्रतिशत घटकर 1.75 अरब डॉलर रहा, जिसमें स्विट्जरलैंड में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई। यह स्थिति तब है जब भारत और स्विट्जरलैंड के बीच आजादी के समय से ही सौहार्दपूर्ण संबंध रहे हैं, जिसकी नींव 1948 की मैत्री संधि ने रखी थी। राष्ट्रपति परमेलिन की यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने तथा आपसी हित के नए क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है। अपनी एक साल के भीतर दूसरी भारत यात्रा पर पहुंचे राष्ट्रपति परमेलिन ने भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) की मजबूती पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा एक शानदार मौका है कि दोनों देश अपने रिश्ते को कितना महत्व देते हैं। परमेलिन ने भारत और स्विट्जरलैंड के बीच के बंधन को साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, भरोसे और आपसी सम्मान पर आधारित बताया। उन्होंने भारत-ईएफटीए-टीईपीए के लागू होने की पहली वर्षगांठ मनाने पर विशेष खुशी व्यक्त की, जिसे 1 अक्टूबर, 2025 को लागू किया गया था, हालांकि 10 मार्च, 2024 को इस पर हस्ताक्षर हुए थे। इस मजबूत होते संबंध के विपरीत, भारत की अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच बातचीत उस मोड़ पर पहुंच गई है, जहां से आगे किसी भी तरह का समझौता या रियायत देना दोनों के लिए बहुत मुश्किल होगा। यह बयान अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर के उस आकलन के बाद आया है, जिसमें कहा गया था कि भारतीय व्यापार मंत्री पीयूष गोयल के साथ बैठकों के बावजूद कोई तत्काल समझौता संभव नहीं है। फरवरी 2025 से बाजार पहुंच और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर केंद्रित ये बातचीत अब गतिरोध में फंसी दिख रही हैं। सीतारमण ने यह भी बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में था और अमेरिका इस व्यापार में घाटे में था। यह स्थिति भारत के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करती है, खासकर जब वह वैश्विक स्तर पर अपने व्यापारिक संबंधों का विस्तार करने का प्रयास कर रहा है। नई दिल्ली में 4-5 अक्टूबर को होने वाली म्यूनिख लीडर्स मीटिंग भी वैश्विक भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक घटनाक्रमों पर चर्चा के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगी। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया भर में आर्थिक और राजनीतिक अनिश्चितता का माहौल है। इस तरह की बैठकें विभिन्न देशों को एक साथ लाकर साझा चुनौतियों का समाधान खोजने में मदद करती हैं। राष्ट्रपति परमेलिन की यात्रा ऐसे समय में हुई है जब भारत अमेरिका के साथ एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौते पर गतिरोध का सामना कर रहा है। हालांकि, पहले वर्ष में व्यापार के नतीजे मिश्रित रहे हैं।
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भारत-स्विट्जरलैंड संबंध मजबूत, पर अमेरिकी व्यापार डील में गतिरोध जारी
विशेष स्थानीय प्रतिनिधि6 अक्टूबर 2026 को 12:32 am बजे

भारत-स्विट्जरलैंड संबंध मजबूत, पर अमेरिकी व्यापार डील में गतिरोध जारी
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