भारत-स्विट्जरलैंड ने व्यापार, निवेश, शिक्षा, रक्षा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया
भारत और स्विट्जरलैंड ने व्यापार, निवेश, तकनीक, शिक्षा, रक्षा और कई दूसरे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है। स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ परमलिन की भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके साथ व्यापक बातचीत की। विदेश मंत्रालय के सचिव पश्चिम सिबी जॉर्ज ने बताया कि भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता यानी टीईपीए इस रिश्ते का प्रमुख आधार है। इसका लक्ष्य भारत में 10 लाख प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा करना है। दोनों पक्ष अब इस समझौते को जमीन पर लागू करने और निवेश बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्विट्जरलैंड की रचनात्मक उद्योगों को अगले साल होने वाले वेव्स 2.0 में हिस्सा लेने का न्योता दिया। पिछले साल भी वेव्स में स्विट्जरलैंड ने भाग लिया था। प्रधानमंत्री ने स्विस विश्वविद्यालयों को भारत में अपने कैंपस खोलने के लिए भी आमंत्रित किया। इसके अलावा स्विस कंपनियों, खासकर वित्तीय क्षेत्र की कंपनियों से गुजरात स्थित गिफ्ट सिटी में भागीदारी बढ़ाने का आग्रह किया गया। भारत और स्विट्जरलैंड ने प्रवासन एवं गतिशीलता साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके साथ ही युवा पेशेवरों से जुड़ा एक समझौता भी हुआ है। इन समझौतों से कुशल पेशेवरों, छात्रों, शोधकर्ताओं और युवाओं की दोनों देशों के बीच आवाजाही आसान बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। सिबी जॉर्ज ने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड के संबंध लंबे समय से दोस्ताना हैं। दोनों देशों के बीच विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने पर भी सहमति बनी। भारत और स्विट्जरलैंड के बीच विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में पहले से संस्थागत सहयोग मौजूद है, जिसमें स्विस-इंडिया संयुक्त शोध कार्यक्रम, स्विसनेक्स इंडिया और स्विस नेशनल साइंस फाउंडेशन शामिल हैं। स्विस सरकार की उत्कृष्टता छात्रवृत्ति भी इस सहयोग का हिस्सा है। भारत और स्विट्जरलैंड के संबंध केवल व्यापार और निवेश तक सीमित नहीं हैं। 150 से ज्यादा भारतीय कंपनियों ने स्विट्जरलैंड में अपनी सहायक कंपनियां स्थापित की हैं।




