2019 में भारत के एंटी-सैटेलाइट मिसाइल परीक्षण से मची थी अफरा-तफरी
पूर्व अमेरिकी अधिकारी ने किया खुलासा: भारत के मिसाइल परीक्षण से वाशिंगटन में मची थी अफरा-तफरी
यह घटना वाशिंगटन के शीर्ष खुफिया दफ्तरों में हड़कंप मचाने वाली साबित हुई, क्योंकि अमेरिका को इसकी भनक तक नहीं लगी थी। पूर्व अमेरिकी खुफिया अधिकारी डेविड ग्रश ने हाल ही में खुलासा किया है कि इस अप्रत्याशित सैन्य शक्ति प्रदर्शन ने अमेरिकी खुफिया तंत्र में किस कदर अफरा-तफरी मचा दी थी। ग्रश ने बताया कि जब भारत के मिसाइल टेस्ट की खबर आई, तब अमेरिका की किसी भी इंटेलिजेंस एजेंसी के पास इसका कोई पूर्व इनपुट नहीं था। उनके दफ्तर में रखे सीक्रेट फोन एक साथ बजने लगे थे, जिससे उनकी घबराहट और उलझन साफ झलक रही थी। ओडिशा के एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से दागी गई एक इंटरसेप्टर मिसाइल ने निचली पृथ्वी की कक्षा में 300 किलोमीटर की ऊंचाई पर तैर रही एक लाइव सैटेलाइट को पिन-पॉइंट सटीकता के साथ पूरी तरह तबाह कर दिया था। इस सफल परीक्षण के साथ ही भारत दुनिया का चौथा ऐसा देश बन गया, जिसके पास अंतरिक्ष में किसी भी दुश्मन सैटेलाइट को मार गिराने की क्षमता है। भारत से पहले यह तकनीक केवल अमेरिका, रूस और चीन के पास ही उपलब्ध थी। भारत की इस काइनेटिक इंटरसेप्ट तकनीक के इतने चुपचाप और सटीक निष्पादन ने अमेरिकी रक्षा विश्लेषकों को पूरी तरह से चौंका दिया था। सैटेलाइट के नष्ट होने के बाद के शुरुआती घंटों में अमेरिकी रक्षा अधिकारियों और पेंटागन में मलबे को लेकर घबराहट फैल गई थी। अमेरिका को सबसे बड़ा डर इस बात का था कि सैटेलाइट के टूटने से अंतरिक्ष में फैला मलबा कहीं उनकी अपनी सैन्य और वाणिज्यिक सैटेलाइट्स या अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) से न टकरा जाए। हालांकि, भारत ने यह परीक्षण बहुत कम ऊंचाई (300 किमी) पर किया था, जिससे सारा मलबा कुछ ही हफ्तों में अपने आप गिरकर वायुमंडल में जलकर खत्म हो गया। इस घटना ने वैश्विक अंतरिक्ष राजनीति के पूरे समीकरण को बदलकर रख दिया। इस मिशन से पहले तक पश्चिमी देश भारत को केवल नागरिक सैटेलाइट्स और रॉकेट लांच करने वाला देश मानते थे। लेकिन मिशन शक्ति ने दुनिया को यह स्पष्ट संदेश दे दिया कि भारत अपने अंतरिक्ष संपत्तियों की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है। पूर्व अमेरिकी खुफिया अधिकारी डेविड ग्रश का हालिया खुलासा इस बात का सबूत है कि 2019 में भारत ने जो कदम उठाया था, उसने वाशिंगटन के गलियारों को हिलाकर रख दिया था। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि इतने बड़े सैन्य शक्ति प्रदर्शन की जानकारी अमेरिकी एजेंसियों को क्यों नहीं थी।




