सत्र का सत्रावसान न होने से अध्यादेश पर भी लगी रोक
संसद के मानसून सत्र का औपचारिक सत्रावसान हुए करीब दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन दोनों सदनों का सत्रावसान अब तक नहीं हुआ है। 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए गए लोकसभा और राज्यसभा, 54 दिनों से बिना सत्रावसान के हैं। यह संसद के रिकॉर्ड के अनुसार, दोनों सदनों के एक साथ इतने लंबे समय तक बिना सत्रावसान रहने का सबसे लंबा अंतराल है। इससे पहले 1989 में दोनों सदन 53 दिनों तक ऐसी स्थिति में रहे थे। इस असामान्य स्थिति के कारण सरकार के पास मौजूदा मानसून सत्र की बैठक दोबारा बुलाने का विकल्प खुला हुआ है। इसी वजह से राजनीतिक हलकों में संसद की विशेष बैठक बुलाए जाने की अटकलें तेज हो गई हैं। सत्तारूढ़ खेमे से जुड़े सूत्रों के हवाले से आने वाले दिनों में संसद की बैठक बुलाए जाने की संभावनाओं पर चर्चा की जा रही है। हालांकि, सरकार की ओर से फिलहाल संसद की बैठक बुलाने या उसके संभावित एजेंडे को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। सत्रावसान न होने की स्थिति का एक महत्वपूर्ण संवैधानिक पहलू भी है।





