शिवकुमार ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को गांधीजी के विचारों को अपनाने में संकोच नहीं करना चाहिए और आज की पीढ़ी को इस पर गंभीरता से चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि व्यक्ति भले ही मर जाए, लेकिन उसके विचार जीवित रहते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया भर के कई देशों में गांधीजी की प्रतिमाएं हैं और उनके विचारों का अध्ययन विभिन्न विश्वविद्यालयों में किया जा रहा है। अहिंसा दिवस जैसे मौकों पर दुनिया गांधीजी के विचारों को याद करती है। उन्होंने बताया कि गांधीजी के निधन पर संयुक्त राष्ट्र की इमारतों पर लगे विभिन्न देशों के झंडों को झुकाकर सम्मान दिया गया था। यह गांधीजी के वैश्विक प्रभाव का प्रमाण है, जिसे कोई नकार नहीं सकता। डीके शिवकुमार ने अपने राजनीतिक जीवन की प्रेरणा के बारे में बताते हुए कहा कि जब वे 12–13 साल के थे, तब कनकापुरा में एस। उनके माता-पिता उन्हें उनके पास ले गए थे और उनके पैर छूने को कहा था। उस समय नेतागणों को मिलने वाले सम्मान को देखकर शिवकुमार के मन में राजनीति में आने का विचार आया। उन्होंने महसूस किया कि राजनीति ही एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जहाँ किसी भी पेशे में रहते हुए जनसेवा का अवसर मिलता है। इसी सोच के साथ उन्होंने राजनीति में कदम रखा। उन्होंने यह भी बताया कि गांधी भवन, बेंगलुरु में गांधीजी की जीवनगाथा को स्कैन करके पढ़ा जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांधीजी एक महान नेता थे और उनका व्यक्तित्व असाधारण था। उन्होंने न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया को शांति का संदेश दिया।
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गांधीजी के विचारों को अपनाने का आह्वान
4 अक्टूबर 2026 को 12:00 am बजे



