नोकिया (नोकिअ) भारत को टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में सक्रिय है। कंपनी सरकार की प्रस्तावित टेलीकॉम प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) 2.0 नीति का पुरजोर समर्थन कर रही है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य देश के भीतर टेलीकॉम उपकरणों के उत्पादन को बढ़ावा देना और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना है। नोकिया का दृढ़ विश्वास है कि भारत की मजबूत विनिर्माण क्षमता, उत्कृष्ट इंजीनियरिंग प्रतिभा और उन्नत अनुसंधान सुविधाओं का लाभ उठाकर, वह वैश्विक टेलीकॉम सप्लाई चेन में एक महत्वपूर्ण स्थान हासिल कर सकता है। नोकिया के भारत परिचालन प्रमुख, समर मित्तल, ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कंपनी के चेन्नई स्थित विनिर्माण संयंत्र से उत्पादित कुल टेलीकॉम उपकरणों का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात किया जाता है। यह आंकड़ा भारत की बढ़ती निर्यात क्षमता का एक स्पष्ट प्रमाण है। नोकिया का लक्ष्य भारत को केवल एक असेंबली हब के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे केंद्र के रूप में स्थापित करना है जो अधिक मूल्य-वर्धित विनिर्माण और तकनीकी नवाचार में अग्रणी हो। सरकार मौजूदा टेलीकॉम पीएलआई योजना के बाद एक नई और विस्तारित इंसेंटिव प्रोग्राम, जिसे पीएलआई 2.0 कहा जा रहा है, पर काम कर रही है। वर्तमान पीएलआई योजना का कुल परिव्यय 12,195 करोड़ रुपये है और यह मार्च 2027 में समाप्त होने वाली है। इसके बाद, एक नई योजना के वित्त वर्ष 2028 की पहली तिमाही में शुरू होने का अनुमान है। इस आगामी नीति में केवल तैयार टेलीकॉम उपकरणों के निर्माण पर ही ध्यान केंद्रित नहीं किया जाएगा, बल्कि कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग, बैकवर्ड इंटीग्रेशन (घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना) और देश के भीतर अधिक मूल्य जोड़ने वाली गतिविधियों पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। नोकिया इस रणनीतिक बदलाव को अत्यंत महत्वपूर्ण मानता है, क्योंकि इससे न केवल भारत में स्थानीय आपूर्तिकर्ता नेटवर्क को मजबूती मिलेगी, बल्कि टेलीकॉम उपकरणों की संपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला के देश में ही विकसित होने का मार्ग भी प्रशस्त होगा। नोकिया की चेन्नई प्लांट से होने वाला निर्यात, जो उत्पादन का लगभग 40 प्रतिशत है, भारत की विनिर्माण शक्ति और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता को दर्शाता है। कंपनी भारत में केवल उत्पादन गतिविधियों तक ही सीमित नहीं है; बल्कि यह अनुसंधान एवं विकास (आर&डी), सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, ऑपरेशनल एक्सीलेंस और मरम्मत सेवाओं जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है। भारतीय इंजीनियरिंग टीमों द्वारा विकसित किए गए ज्ञान और नवीन समाधानों का उपयोग नोकिया के वैश्विक परिचालन में भी प्रभावी ढंग से किया जा रहा है, जो भारत की तकनीकी विशेषज्ञता के महत्व को रेखांकित करता है। यह दर्शाता है कि नोकिया भारत को एक ऐसे हब के रूप में देखता है जहाँ से न केवल उत्पाद बनाए जा सकते हैं, बल्कि महत्वपूर्ण बौद्धिक संपदा और तकनीकी नवाचार भी उत्पन्न हो सकते हैं। भारत में 5ग नेटवर्क के तेजी से विस्तार ने दूरसंचार क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत की है। इस विस्तार के बाद, अब दूरसंचार कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे इस शक्तिशाली नेटवर्क का उपयोग करके नए व्यावसायिक अवसर कैसे पैदा करें और राजस्व के नए स्रोत कैसे विकसित करें। नोकिया के अनुसार, इस दिशा में नेटवर्क स्लाइसिंग, प्राइवेट नेटवर्क की स्थापना और सॉफ्टवेयर-आधारित सेवाओं का विकास महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ये प्रौद्योगिकियां कंपनियों को अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप अनुकूलित नेटवर्क समाधान प्रदान करने में सक्षम बनाएंगी। उदाहरण के तौर पर, किसी औद्योगिक इकाई या फैक्ट्री को सामान्य मोबाइल नेटवर्क की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और उच्च-प्रदर्शन वाली कनेक्टिविटी की आवश्यकता हो सकती है। ऐसी विशेष जरूरतों को पूरा करने के लिए, प्राइवेट 5ग नेटवर्क एक आदर्श समाधान प्रदान कर सकते हैं। ये नेटवर्क विशिष्ट व्यावसायिक अनुप्रयोगों के लिए समर्पित होते हैं, जिससे डेटा सुरक्षा और प्रदर्शन सुनिश्चित होता है। इसी प्रकार, नेटवर्क स्लाइसिंग की तकनीक एक ही भौतिक नेटवर्क के भीतर विभिन्न उपयोगकर्ताओं या अनुप्रयोगों के लिए अलग-अलग वर्चुअल नेटवर्क बनाने की सुविधा प्रदान करती है। यह प्रत्येक वर्चुअल नेटवर्क को उसकी विशिष्ट बैंडविड्थ, विलंबता (लतेन्च्य) और सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलित करने की अनुमति देता है। नोकिया अब केवल पारंपरिक नेटवर्क उपकरण बेचने के अपने व्यवसाय मॉडल से आगे बढ़कर, ग्राहकों के साथ मिलकर ऐसे अभिनव उपयोग के मामलों (उसे चसेस) को विकसित करने पर अधिक जोर दे रहा है। कंपनी का मानना है कि 5ग तकनीक की वास्तविक व्यावसायिक क्षमता और कमाई तभी बढ़ेगी, जब इसके नए और विविध अनुप्रयोग बड़े पैमाने पर अपनाए जाएंगे और सफल होंगे। यह एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बदलाव है, जो सेवा-उन्मुख दृष्टिकोण की ओर इशारा करता है, जहाँ नोकिया अपने ग्राहकों के लिए मूल्य बनाने में सक्रिय भागीदार बनना चाहता है। दूरसंचार क्षेत्र में अगला बड़ा और परिवर्तनकारी बदलाव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-रेडियो एक्सेस नेटवर्क (एआई-आरएएन) के रूप में देखा जा रहा है।
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नोकिया भारत को टेलीकॉम हब बनाने की तैयारी में, पीएलआई नीति का समर्थन
8 अक्टूबर 2026 को 11:58 pm बजे

नोकिया भारत को टेलीकॉम हब बनाने की तैयारी में, पीएलआई नीति का समर्थन
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