कैप्टन मच्छार पर हमले के बाद एयरलाइन की सेवा बहाली की मांग खारिज
फ्लाईदुबई की उड़ानें बहाल करने की मांग को इजरायल ने ठुकरा दिया है। 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट में सह-पायलट ने कैप्टन स्मित मच्छार पर कॉकपिट में हमला कर दिया था। इस हमले में कैप्टन मच्छार गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिससे विमान में सवार 170 से अधिक यात्रियों की जान खतरे में पड़ गई थी। बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाली इजरायली सरकार ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए एयरलाइन की उड़ानें फिर से शुरू करने की अर्जी फिलहाल नामंजूर कर दी है। यह घटना 30 सितंबर को तब हुई जब फ्लाईदुबई की फ्लाइट दुबई से तेल अवीव की ओर बढ़ रही थी। विमान में क्रू सहित करीब 180 लोग सवार थे। उड़ान के दौरान, सह-पायलट हम्माम अल- हम्मामी ने कॉकपिट में अचानक इमरजेंसी कुल्हाड़ी निकाली और कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला कर दिया। इस हमले में कैप्टन मच्छार की खोपड़ी की हड्डी टूट गई और उन्हें गंभीर चोटें आईं। इसके बावजूद, भारतीय पायलट ने हिम्मत नहीं हारी और खून से लथपथ होने के बावजूद सह- पायलट को काबू में किया और विमान का नियंत्रण अपने हाथों में बनाए रखा। इस बहादुरी से 9/11 जैसी बड़ी साजिश को नाकाम किया गया, जिससे 170 से ज्यादा यात्रियों की जान बच गई। विमान में सवार ज्यादातर यात्री इजरायली नागरिक थे और सह-पायलट के इस हमले को किसी बड़े हादसे या आतंकवादी घटना को अंजाम देने की कोशिश माना जा रहा था। कैप्टन मच्छार की सतर्कता और बहादुरी के कारण विमान किसी बड़े हादसे का शिकार होने से बच गया। इस घटना के एक सप्ताह बाद, फ्लाईदुबई ने इजरायल में अपनी सेवाएं दोबारा शुरू करने की इजाजत मांगी थी।
हमले के समय, विमान की ऊंचाई में अचानक गिरावट देखी गई, जो लगभग 14 हजार फीट थी। यह स्थिति यात्रियों के लिए बेहद खतरनाक थी और किसी भी अनहोनी की आशंका बढ़ गई थी। कैप्टन मच्छार, गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, अपनी ड्यूटी पर डटे रहे और उन्होंने सह-पायलट के हमले का सफलतापूर्वक सामना किया। उन्होंने विमान को सुरक्षित रखने के लिए हर संभव प्रयास किया। कैप्टन स्मित मच्छार ने अपनी जान की परवाह किए बिना, सह-पायलट को नियंत्रित करने में सफलता प्राप्त की। उन्होंने विमान का नियंत्रण अपने हाथों में बनाए रखा और यह सुनिश्चित किया कि विमान सुरक्षित रूप से तेल अवीव पहुंचे। इस साहसिक कार्य के लिए कैप्टन मच्छार की बहादुरी की व्यापक रूप से प्रशंसा की गई। उनकी सतर्कता ने 170 से अधिक लोगों की जान बचाई। इस कॉकपिट हमले के बाद फ्लाईदुबई की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इजरायल की सरकार ने एयरलाइन की उड़ानें फिर से शुरू करने की मांग को फिलहाल ठुकरा दिया है। यह निर्णय यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सरकार की गंभीरता को दर्शाता है। फ्लाईदुबई को अब अपनी सुरक्षा प्रक्रियाओं को मजबूत करने और यात्रियों का विश्वास फिर से हासिल करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। एयरलाइन की तरफ से यह भी कहा गया कि मामले की जांच लगभग पूरी हो चुकी है और जिम्मेदार कर्मियों को नौकरी से हटा दिया गया है।







