मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शनिवार को राज्य की गंभीर सूखे की स्थिति और फसल क्षति का आकलन करने के लिए केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव अजीत कुमार साहू के नेतृत्व में एक अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम के साथ बैठक की। यह टीम राज्य में वर्षा की कमी से हुए नुकसान का मूल्यांकन करने के लिए कर्नाटक आई है। राज्य में इस वर्ष हाल के वर्षों में सबसे गंभीर सूखे की स्थिति देखी जा रही है, जिसमें पर्याप्त वर्षा की कमी, व्यापक फसल क्षति और लाखों किसान परिवारों के लिए कठिनाई पैदा हुई है। केंद्रीय टीम तीन टीमों में 12 जिलों का दौरा कर रही है, जो राज्य के 217 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किए जाने के बाद स्थिति का मूल्यांकन करेगी। राज्य ने पहले 101 सूखा प्रभावित तालुकों के लिए 3,705.30 करोड़ रुपये की सहायता का अनुरोध किया था। इस बीच, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कर्नाटक के किसानों के लिए तत्काल केंद्रीय सहायता की मांग की है। खड़गे ने पत्र में कहा है कि राज्य को ₹18,748.23 करोड़ रुपये के अनुमानित नुकसान के मद्देनजर राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया निधि (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि (एसडीआरएफ) के तहत ₹3,705.30 करोड़ रुपये की सहायता की आवश्यकता है। उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि राज्य द्वारा अनुरोधित राशि को तुरंत जारी किया जाए। खड़गे ने कल्याण कर्नाटक क्षेत्र में सूखे से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए एक केंद्रीय टीम भेजने का भी अनुरोध किया। इसके अतिरिक्त, खड़गे ने केंद्र सरकार से 2015-16 के कृषि गणना के बजाय कर्नाटक के अद्यतन 'भूमि' रिकॉर्ड का उपयोग करके छोटे और सीमांत किसानों के लिए इनपुट सब्सिडी की गणना करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इससे उन किसानों को राहत मिलेगी जो सहायता के पात्र हैं लेकिन वर्तमान गणना विधियों के कारण बाहर रह जाते हैं। राज्य में वर्षा, बाढ़ से 6 लाख हेक्टेयर से अधिक फसलें क्षतिग्रस्त हुई हैं, जिसके बाद यह मूल्यांकन किया जा रहा है।
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राज्य में सूखे की गंभीर स्थिति, फसल क्षति का आकलन करने पहुंची केंद्रीय टीम
4 अक्टूबर 2026 को 12:00 am बजे

राज्य में सूखे की गंभीर स्थिति, फसल क्षति का आकलन करने पहुंची केंद्रीय टीम
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