कलेक्टर हरेंद्र नारायन के निर्देशानुसार, जिला पंचायत सभागार में आज कृषि अधिकारियों का एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य कम वर्षा की स्थिति में रबी फसलों के बेहतर प्रबंधन और कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देना था। कार्यशाला में वैज्ञानिकों ने कम पानी वाली फसलों के चयन, उपयुक्त किस्मों की जानकारी, उतेरा और जीरो टिलेज जैसी बुवाई की तकनीकों पर प्रकाश डाला। इसके अतिरिक्त, माइक्रो इरीगेशन के माध्यम से जल के कुशल उपयोग और बचत के तरीकों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। प्रशिक्षण में संतुलित और मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक उपयोग के महत्व को समझाया गया। साथ ही, व्हाट्सएप के माध्यम से उर्वरक बुकिंग की प्रक्रिया और नरवाई प्रबंधन तथा फसल अवशेषों के उचित उपयोग के संबंध में भी जानकारी प्रदान की गई। इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में कृषि, आत्मा, पशुपालन, मत्स्य, उद्यानिकी और कृषि अभियांत्रिकी विभागों के मैदानी अमले ने भाग लिया। वैज्ञानिकों ने इन सभी विभागों के अधिकारियों को तकनीकी मार्गदर्शन दिया। कृषि विज्ञान केंद्र और आंचलिक अनुसंधान केंद्र के विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण सत्रों का संचालन किया। उन्होंने नवीनतम कृषि तकनीकों और टिकाऊ प्रथाओं पर जोर दिया ताकि बदलती जलवायु परिस्थितियों में भी बेहतर उपज सुनिश्चित की जा सके। यह प्रशिक्षण कम वर्षा वाले क्षेत्रों में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लचीला बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अधिकारियों को नवीनतम जानकारी से लैस किया गया ताकि वे किसानों को प्रभावी ढंग से सलाह दे सकें।
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कम पानी वाली फसलों के लिए प्रशिक्षण
8 अक्टूबर 2026 को 11:58 pm बजे



