राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर केंद्रीय जेल बिलासपुर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सहयोग से विशेष कार्यक्रम आयोजित कर बंदियों को आत्मसुधार व नई राह चुनने का संदेश दिया गया
बिलासपुर की केंद्रीय जेल में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सहयोग से हुए इस आयोजन में बंदियों को आत्मचिंतन, सकारात्मक बदलाव और नई राह चुनने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ भजन की धुन के बीच दीप प्रज्वलन तथा दोनों महापुरुषों के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। इस दौरान बंदियों ने ‘ऐ मालिक तेरे बंदे हम’ और ‘रघुपति राघव राजाराम’ जैसे भजनों की प्रस्तुति दी, जिसकी मुख्य अतिथि प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश शिराजुद्दीन कुरैशी ने सराहना की। न्यायाधीश शिराजुद्दीन कुरैशी ने बंदियों को संबोधित करते हुए कहा कि जेल का जीवन कठिन हो सकता है, लेकिन यह समय निराशा में व्यतीत करने के बजाय आत्मसुधार और सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनना चाहिए। उन्होंने बंदियों से जेल में उपलब्ध अवसरों का सदुपयोग करते हुए नई चीजें सीखने, व्यक्तित्व में सुधार करने और अनुशासन व अच्छे आचरण के साथ समय बिताने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी घोषणा की कि केंद्रीय जेल बिलासपुर में निरुद्ध दंडित बंदियों को नियमानुसार 10-10 दिन के अतिरिक्त परिहार (रेमिशन) का लाभ दिया जाएगा।




