नई शराब नीति से आईएमएल से राजस्व में भारी वृद्धि, बीयर से मामूली जबकि उपभोक्ताओं पर असर अलग
कर्नाटक में पांच महीने पहले लागू हुई नई शराब कर नीति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इस नीति के तहत शराब में मौजूद अल्कोहल की मात्रा के आधार पर कर लगाया जाता है। उद्योग संगठन कॉनफेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनीज (सीआईबीसी) ने सरकार से इस नीति पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। संगठन का तर्क है कि भले ही बीयर की बिक्री में भारी वृद्धि हुई हो, लेकिन आबकारी राजस्व में वृद्धि का मुख्य कारण भारतीय निर्मित शराब (आईएमएल) रही है। जुलाई से सितंबर 2026 की अवधि के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बीयर की बिक्री में लगभग 50% की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके विपरीत, आईएमएल की बिक्री में केवल 1.52% की मामूली वृद्धि हुई। हालांकि, इस अवधि में आईएमएल की बिक्री से प्राप्त राजस्व 1,064.52 करोड़ रुपये बढ़ा है, जबकि बीयर की बिक्री से राजस्व में केवल 228.57 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई। कुल मिलाकर, इस तिमाही में कर्नाटक का कुल आबकारी राजस्व 1,291.94 करोड़ रुपये बढ़ा है। सीआईबीसी के विश्लेषण के अनुसार, इस अतिरिक्त राजस्व में आईएमएल का योगदान लगभग 82% रहा, जबकि बीयर का योगदान केवल 18% रहा। यह दर्शाता है कि बिक्री की मात्रा में वृद्धि की तुलना में आईएमएल उपभोक्ताओं से अधिक कर संग्रह हुआ है।
संगठन का मानना है कि नई नीति से अपेक्षित राजस्व वृद्धि नहीं हुई है, और इसका बोझ मुख्य रूप से कम आय वाले उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। यह नीति उन उपभोक्ताओं को प्रभावित कर सकती है जो सस्ती शराब खरीदते हैं, क्योंकि उन पर कर का बोझ अधिक पड़ा है। वहीं, प्रीमियम शराब पीने वालों को कुछ राहत मिल सकती है।






