कर्नाटक सरकार ने जुलाई से सितंबर 2026 की दूसरी तिमाही में आबकारी राजस्व में 49.69 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की है। इस अवधि में राज्य को 11595.88 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जो पिछले साल इसी अवधि के 7968.69 करोड़ रुपये से काफी अधिक है। यह वृद्धि मुख्य रूप से बीयर और इंडियन मेड लिकर (आईएमएल) की बिक्री में उल्लेखनीय बढ़ोतरी के कारण हुई है। शराब मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होने के बावजूद, यह राज्य सरकारों के लिए राजस्व का एक बड़ा स्रोत बनी हुई है। आंकड़ों के अनुसार, इस तिमाही में बीयर की बिक्री में अप्रत्याशित उछाल देखा गया। जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान 10303.94 करोड़ रुपये का राजस्व बीयर से मिला, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 9033.21 करोड़ रुपये था। बीयर की बढ़ती लोकप्रियता का सीधा असर सरकार की आय पर पड़ा, जिससे आबकारी राजस्व में यह महत्वपूर्ण उछाल आया। इंडियन मेड लिकर (आईएमएल) की बिक्री में भी वृद्धि हुई, हालांकि यह बीयर जितनी तेज नहीं रही। लाइसेंस फीस और जुर्माने जैसे अन्य स्रोतों से प्राप्त राजस्व लगभग स्थिर रहा। इस अवधि में इन स्रोतों से 1100.75 करोड़ रुपये दर्ज किए गए, जबकि पिछले साल यह 1099.60 करोड़ रुपये था। यह मामूली वृद्धि दर्शाता है कि शराब की खपत के पैटर्न में बदलाव के बावजूद, अन्य राजस्व धाराओं में खास बढ़ोतरी नहीं हुई है। कुल मिलाकर, यह स्थिति दर्शाती है कि कर्नाटक में शराब की खपत का पैटर्न बदल रहा है। बीयर एक पसंदीदा विकल्प के रूप में उभर रही है, जिससे राज्य सरकार को आबकारी राजस्व में बंपर बढ़ोतरी हासिल हुई है। डीके शिवकुमार सरकार ने हाल ही में आबकारी विभाग से जबरदस्त कमाई दर्ज की है, जो राज्य के वित्तीय स्वास्थ्य के लिए एक सकारात्मक संकेत है। इस महत्वपूर्ण वृद्धि का मुख्य कारण बीयर की बढ़ती लोकप्रियता और उपलब्धता रही है, जिसने उपभोक्ताओं को अधिक आकर्षित किया है।
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बीयर की बढ़ती मांग से कर्नाटक सरकार को राजस्व में भारी उछाल
6 अक्टूबर 2026 को 11:56 pm बजे



