अक्टूबर की सुहानी धूप और बदलते मौसम के बीच राष्ट्रीय चेतना अभिव्यक्ति परिवार की ओर से आयोजित एक यादगार काव्य संध्या 4 अक्टूबर रविवार को उमंग और स्नेह भरे वातावरण में सम्पन्न हुई। बेंगलूरु और देश के अन्य हिस्सों के श्रेष्ठ रचनाकारों ने अपनी कविताओं की मिठास और साहित्यिक सुवास से उपस्थित जनसमूह के मन को भावनाओं, कल्पनाओं और साहित्यिक रंगों से सराबोर कर दिया। इस आयोजन की मुख्य अतिथि प्रोफेसर अनुपमा तिवारी थीं, जबकि विशिष्ट अतिथि के तौर पर पटल की श्रेष्ठ साहित्यकार अनुराधा के0 उपस्थित रहीं। संस्थापक प्रो. अरविंद गुप्ता ने संस्था के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए सभी रचनाकारों का हार्दिक स्वागत किया। अनिता तोमर और उषा उमेश गुप्ता ने क्रमशः प्रोफेसर अनुपमा तिवारी और अनुराधा के0 का परिचय प्रस्तुत किया, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और बढ़ गई। काव्य संध्या का शुभारम्भ मंजु गुप्ता की अध्यक्षता में हुआ, जिसका संचालन रेणु कुकरेती ने बड़ी कुशलता से किया। कार्यक्रम का आरंभ शेफालिका सिन्हा द्वारा प्रस्तुत शारदे वंदना से हुआ, जिसने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इसके पश्चात, वरिष्ठ कवयित्री रचना उनियाल ने अपनी सशक्त कविता से काव्य पाठ का सिलसिला शुरू किया। उनकी रचना ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया और आने वाली प्रस्तुतियों के लिए एक उच्च मंच तैयार किया। इस काव्य संध्या में विभिन्न रचनाकारों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाएँ प्रस्तुत कर प्रशंसा प्राप्त की। इस साहित्यिक उत्सव में उर्मिला श्रीवास्तव 'उर्मि', मृदुला चौहान, गीता चौबे 'गूँज', सुरेश जांगिड़, सुदेश वत्स, सुधा आदेश, कंचन शर्मा, शेफालिका सिन्हा, उषा उमेश गुप्ता, राधेश्याम सुदर्शन, अनिता पंडा 'अन्वी', आशा रानी शरण, शैलजा, अनिल जोशी, एडवोकेट अंजु भारती और इंदुशेखर एन जैसे प्रतिष्ठित साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रत्येक रचनाकार ने अपनी विशिष्ट शैली और सशक्त अभिव्यक्ति से दर्शकों का दिल जीत लिया। उनकी कविताओं में जहाँ सामाजिक सरोकार थे, वहीं प्रेम, प्रकृति और जीवन के विविध पहलुओं का सुंदर चित्रण भी था। कार्यक्रम के दौरान, विशिष्ट अतिथि अनुराधा के0 ने माँ दुर्गा के आगमन पर एक मार्मिक कविता प्रस्तुत की, जिसने नवरात्रि के पावन अवसर की महत्ता को और बढ़ा दिया। उनकी रचना ने जहाँ प्रकृति के बदलते रंगों और उत्सवों की उमंग को दर्शाया, वहीं माँ दुर्गा की शक्ति और ममता का भी सुंदर वर्णन किया। श्रोताओं ने उनकी कविता का तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत किया, जो उनकी प्रस्तुति की उत्कृष्टता का प्रमाण थी। अनुपमा त्रिपाठी ने सभी रचनाकारों द्वारा प्रस्तुत की गई रचनाओं की गहन समीक्षा और सराहना की। उन्होंने न केवल कविताओं के साहित्यिक महत्व पर प्रकाश डाला, बल्कि हिन्दी साहित्य के वर्तमान परिदृश्य और भविष्य की संभावनाओं पर भी अपने अमूल्य विचार व्यक्त किए। उनके विश्लेषण ने रचनाकारों को अपनी कला को और निखारने के लिए प्रेरित किया और श्रोताओं को साहित्य की गहराई को समझने का अवसर प्रदान किया। इस काव्य संध्या में केवल रचनाकारों और समीक्षकों ने ही भाग नहीं लिया, बल्कि के. शर्मा, अशोक गुप्ता और मीना गुप्ता जैसे साहित्य प्रेमी श्रोता के रूप में भी जुड़े रहे।
समाचार
राष्ट्रीय चेतना परिवार की काव्य संध्या सम्पन्न, रचनाकारों ने बिखेरी साहित्यिक सुवास
6 अक्टूबर 2026 को 12:32 am बजे

राष्ट्रीय चेतना परिवार की काव्य संध्या सम्पन्न, रचनाकारों ने बिखेरी साहित्यिक सुवास
साझा करेंWhatsApp



