दक्षिण अफ्रीका की जानी-मानी न्यायविद् नवनीतम 'नवी' पिल्लई को वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया है। यह घोषणा नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में की गई। उन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून और शांति को बढ़ावा देने के उनके असाधारण प्रयासों के लिए यह सम्मान मिला है। पिल्लई ने अपने लंबे करियर में अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे और प्रभाव को व्यापक बनाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। नवी पिल्लई ने रवांडा के लिए गठित अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण में न्यायाधीश और अध्यक्ष के रूप में काम किया। इस न्यायाधिकरण ने 1994 के रवांडा नरसंहार से जुड़े मामलों की सुनवाई की। पिल्लई की भूमिका ऐसे ऐतिहासिक कानूनी फैसलों में महत्वपूर्ण रही, जिनमें यह स्थापित किया गया कि यौन हिंसा और दुष्कर्म परिस्थितियों के आधार पर मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार के अपराध का हिस्सा हो सकते हैं। एक ऐतिहासिक मामले में प्रचार के माध्यम से नरसंहार के लिए उकसाने के आरोपों पर भी सुनवाई हुई। रवांडा न्यायाधिकरण के दौरान उन्होंने 'अकायेसु मामले' में एक युगांतकारी भूमिका निभाई, जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय आपराधिक कानून के इतिहास में पहली बार बलात्कार और यौन हिंसा को 'नरसंहार' और युद्ध अपराध के रूप में मान्यता दी गई। इसी मामले में उनकी दूरदर्शिता से एक और कानूनी सफलता मिली, जब पहली बार केवल नफरती प्रोपेगैंडा फैलाकर नरसंहार भड़काने के आधार पर किसी आरोपी पर मुकदमा चलाया गया। उन्होंने अपनी निष्पक्षता, विशेषज्ञता और दृढ़ता से यह साबित किया कि कानूनी तंत्र युद्ध और हिंसा के कृत्यों को रोकने में कारगर हो सकते हैं। नोबेल समिति ने अपने बयान में कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून का उद्देश्य केवल देशों के बीच नियम तय करना नहीं, बल्कि संघर्षों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने और दोषियों को जवाबदेह बनाने की व्यवस्था तैयार करना भी है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के गठन से इस व्यवस्था का विस्तार हुआ। शीत युद्ध समाप्त होने के बाद अंतरराष्ट्रीय न्यायिक तंत्र को मजबूत करने के प्रयासों को भी गति मिली। हालांकि, समिति ने यह भी स्वीकार किया कि अंतरराष्ट्रीय कानून की व्यवस्था हमेशा समान रूप से प्रभावी नहीं रही है। शक्तिशाली देशों और उनके नेताओं ने कई बार जवाबदेही से बचने की कोशिश की है। अलग-अलग मामलों में न्यायिक कार्रवाई के परिणाम भी अलग रहे हैं। इसके बावजूद, कूटनीति, संधियों और कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से विवादों को सुलझाने की दिशा में प्रगति हुई है। समिति के मुताबिक, स्थायी शांति के लिए कानून का शासन जरूरी है। वर्तमान में, नवी पिल्लई फलस्तीनी क्षेत्रों में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच के लिए गठित संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र जांच आयोग की अध्यक्षता कर रही हैं।
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दक्षिण अफ्रीकी न्यायविद् नवी पिल्लई को शांति का नोबेल पुरस्कार, अंतरराष्ट्रीय कानून में योगदान
9 अक्टूबर 2026 को 10:50 pm बजे

दक्षिण अफ्रीकी न्यायविद् नवी पिल्लई को शांति का नोबेल पुरस्कार, अंतरराष्ट्रीय कानून में योगदान
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