वैज्ञानिक शोध और कृषि शिक्षा के लिए भारत और घाना के बीच दो अहम समझौते हुए
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने घाना के विदेश मंत्री सैम ओकुजेटो अबलाक्वा से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापक साझेदारी को आगे बढ़ाने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से बातचीत हुई। जयशंकर मंगलवार को घाना पहुंचे, जो तीन अफ्रीकी देशों की उनकी यात्रा का पहला पड़ाव है। घाना पहुंचने के बाद उन्होंने वहां के विदेश मंत्री से मुलाकात की और कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि भारत और घाना ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों के साझेदार हैं। दोनों देशों की विकास संबंधी प्राथमिकताएं काफी हद तक एक जैसी हैं और उनके बीच ऐतिहासिक एकजुटता का रिश्ता रहा है। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की बातचीत में व्यापार, निवेश, विकास, दवाइयों, कौशल विकास, रक्षा, तकनीक और लोगों के बीच आपसी संपर्क बढ़ाने जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। दोनों पक्षों ने इन क्षेत्रों में व्यापक साझेदारी को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। भारत और घाना का मानना है कि आपसी सहयोग को नए क्षेत्रों तक पहुंचाकर दोनों देशों के विकास को गति दी जा सकती है। खास तौर पर तकनीक, दवा उद्योग, कृषि अनुसंधान और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग से दोनों देशों को फायदा मिलने की उम्मीद है। विदेश मंत्री जयशंकर ने घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा से भी मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से उन्हें शुभकामनाएं दीं। जयशंकर ने एक्स पर लिखा कि राष्ट्रपति महामा से मिलना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि पिछले साल प्रधानमंत्री मोदी की ऐतिहासिक यात्रा के बाद भारत और घाना की साझेदारी को नई गति मिली है। विदेश मंत्री ने घाना के विकास को लेकर राष्ट्रपति महामा की सोच की सराहना की और अलग-अलग क्षेत्रों में व्यापक साझेदारी को और मजबूत करने की उनकी सकारात्मक पहल का स्वागत किया। जयशंकर और अबलाक्वा की मौजूदगी में भारत और घाना के बीच दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान भी हुआ। पहला समझौता भारतीय प्राणी सर्वेक्षण और घाना विश्वविद्यालय के बीच हुआ, जिसके तहत शैक्षणिक गतिविधियों, वैज्ञानिक अनुसंधान और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाया जाएगा। दूसरा समझौता नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और घाना के सीएसआईआर-क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट के बीच हुआ, जिसका उद्देश्य कृषि अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाना है। इन समझौतों से शोधकर्ताओं और शिक्षण संस्थानों के बीच संपर्क बढ़ाने तथा कृषि और विज्ञान से जुड़े अनुभव साझा करने के अवसर मिल सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुलाई 2025 में घाना की यात्रा की थी। यह उनकी घाना की पहली द्विपक्षीय यात्रा थी। साथ ही, करीब तीन दशक बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने घाना का दौरा किया था। इस यात्रा को दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना गया। इसके बाद भारत और घाना ने अपनी साझेदारी को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं। जयशंकर की मौजूदा यात्रा को भी इसी सिलसिले में अहम माना जा रहा है।



