आरा में गुरुवार को महागठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने 'ज्ञानेश हटाओ, लोकतंत्र बचाओ' मार्च निकाला। यह मार्च आरा रेलवे स्टेशन परिसर से शुरू होकर नवादा चौक, करमन टोला होते हुए अंबेडकर चौक तक पहुंचा। इस दौरान राजद, कांग्रेस, माले और वीआईपी पार्टी के सैकड़ों नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। अंबेडकर चौक पहुंचने पर प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और ज्ञानेश कुमार के पुतले फूंके। कार्यकर्ताओं ने 'ज्ञानेश हटाओ, लोकतंत्र बचाओ, वोट हमारा–अधिकार हमारा' जैसे नारे लगाए, जो लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा से जुड़े थे। राजद प्रवक्ता आलोक रंजन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लोकतंत्र की हत्या का गंभीर आरोप लगाया। आलोक रंजन ने इस कार्रवाई के लिए जिम्मेदारी तय करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की, ताकि दोषी लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सके। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र में मताधिकार प्रत्येक पात्र नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, जो 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के नागरिकों को प्राप्त है। आलोक रंजन ने सवाल उठाया कि क्या अब चुनाव आयोग यह तय करेगा कि देश में कौन वोट देगा और कौन नहीं। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए, ताकि किसी भी पात्र नागरिक को उसके मतदान के अधिकार से वंचित न किया जा सके। राजद नेता तेजस्वी प्रसाद यादव ने एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने के शुरुआती दौर में ही इस पर सवाल उठाए थे। उनका मानना था कि एसआईआर के माध्यम से मतदाता सूची तैयार करने से बड़ी संख्या में लोगों के मताधिकार प्रभावित होने की आशंका है। चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के 'शुद्धिकरण' की बात पर आपत्ति जताते हुए आलोक रंजन ने पूछा कि यदि दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाते हैं, तो क्या इसे शुद्धिकरण कहा जाएगा? उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव आयोग की भूमिका महत्वपूर्ण है और उसे सभी राजनीतिक दलों व मतदाताओं का विश्वास बनाए रखना चाहिए। आलोक रंजन ने कहा कि यदि किसी प्रक्रिया से पात्र मतदाताओं का अधिकार प्रभावित होता है, तो उसकी समीक्षा और जवाबदेही जरूरी है। राजद लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी आवाज उठाती रहेगी। उन्होंने मांग की कि एसआईआर और मतदाता सूची में हुए बदलाव की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि नियमों का उल्लंघन या पात्र मतदाताओं के अधिकारों का हनन साबित होता है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
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महागठबंधन ने निकाला 'लोकतंत्र बचाओ' मार्च, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
8 अक्टूबर 2026 को 11:58 pm बजे

महागठबंधन ने निकाला 'लोकतंत्र बचाओ' मार्च, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
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