मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 का दुरुपयोग: मुख्यमंत्री ने भाजपा पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने गुरुवार को बेंगलुरु में आरोप लगाया कि कर्नाटक में चल रही विशेष तीव्र पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत मतदाताओं के नामों को हटाने के लिए बड़ी संख्या में आवेदन जमा करके एक 'षड्यंत्र' रचा जा रहा है। उन्होंने इस एसआईआर प्रक्रिया को 'बड़ा धोखा' करार दिया। शिवकुमार ने दावा किया कि इस षड्यंत्र में भाजपा शामिल है, जिसका उद्देश्य अल्पसंख्यकों, दलितों और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाना है। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के संज्ञान में आए बिना इतने बड़े पैमाने पर 'अवैध' मतदाता नामों को हटाना संभव नहीं है। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि जब तक इस मामले की जांच का आदेश नहीं दिया जाता, तब तक वे मुख्य चुनाव अधिकारी वी। अनबुुकुमार के कार्यालय में ही बैठे रहेंगे। उन्होंने चुनाव आयोग से 'मतों की चोरी' और चुनावी कदाचार के संबंध में एफआईआर दर्ज करने की भी मांग की। शिवकुमार ने बताया कि मतदाताओं के नाम हटाने के लिए विभिन्न नामों से व्यक्तियों द्वारा कई आवेदन जमा करने के कई मामले सामने आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर के तहत अल्पसंख्यकों, दलितों और आदिवासी समुदायों के मतदाताओं को लक्षित किया जा रहा है। शिवकुमार ने कहा कि मतदाताओं के नाम हटाने के लिए 45 लाख आवेदन जमा किए गए हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया के हिस्से के रूप में विजयपुरा में 14,000 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन जमा किए गए थे। उन्होंने कहा कि अन्य मतदाताओं के नाम हटाने के लिए उनके पक्ष में फॉर्म-7 जमा करने वाले लोग मतदान केंद्र स्तर के एजेंट नहीं, बल्कि भाजपा कार्यकर्ता हैं। उन्होंने कहा, 'जब तक जांच का आदेश नहीं दिया जाता, मैं मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय में ही बैठूंगा। आज कैबिनेट की बैठक होने के बावजूद मैं वहां से नहीं लौटूंगा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह समस्या केवल कुछ विधानसभा क्षेत्रों तक सीमित नहीं है।




