विपक्ष ने तीन मुख्य मांगें रखीं: इस्तीफा, एसआईआर रद्दीकरण, बैलेट पेपर
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और एसआईआर (सिस्टमैटिक वोटर एजुकेशन एंड इलेक्टोरल लिटरेसी) प्रक्रिया को लेकर विपक्ष लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोमवार को पार्टी की 3 प्रमुख मांगों को दोहराया, जिनमें ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, एसआईआर प्रक्रिया को रद्द करना और बैलेट पेपर से चुनाव कराना शामिल है। खड़गे ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता और इंडिया गठबंधन के साथी इन मुद्दों पर देशभर में सड़कों पर उतरकर संघर्ष कर रहे हैं, और पार्टी उनके साथ खड़ी है। उन्होंने भाजपा पर ध्यान भटकाने का आरोप लगाते हुए कहा कि तानाशाह घबराया हुआ है और इसके लिए तैयार रहना चाहिए। विपक्ष का दावा है कि एसआईआर प्रक्रिया में बड़ी खामियां हैं और इसके जरिए गलत तरीके से मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं। इस मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों के बीच 10 महीनों के भीतर 14 बार मतभेद सामने आए हैं, और चुनाव आयुक्तों ने इतनी ही बार लिखित आपत्ति भी दर्ज कराई है। विपक्ष ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाते हुए बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की है। इस विवाद के बीच, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एसआईआर को लेकर एक्स पर एक पोस्ट किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि एसआईआर की प्रक्रिया भारत की चुनावी प्रणाली में दशकों पुरानी है और चुनाव आयोग ने चुनावी रोल को अधिक सटीक और भरोसेमंद बनाने के लिए इसे विभिन्न चरणों में लागू किया है। फडणवीस ने याद दिलाया कि चुनाव आयोग ने 1952 और 1956 के बीच देश के अधिकांश हिस्सों में एसआईआर प्रक्रिया का संचालन किया था। वहीं, डीएमके प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि वे बीजेपी के गुलाम हैं और निष्पक्ष व्यक्ति नहीं हैं। दूसरी ओर, भाजपा ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि जब भी वह चुनाव हारता है, तो ईवीएम या चुनाव आयोग को दोष देता है। आयोग ने चुनावी रोल को बेहतर बनाने के लिए इस प्रक्रिया को लागू किया है।




