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बेंगलुरु के एक 40 वर्षीय युवक ने अपने पिता से 90 लाख रुपये की फिरौती ऐंठने के लिए खुद के अपहरण की योजना बनाई। यह घटना मंगलवार को तब सामने आई जब पीड़ित व्यापारी मनोहर पाटिल ने राजारजेश्वरी नगर पुलिस में अपने बेटे मनीष पटेल के अपहरण की शिकायत दर्ज कराई। मनीष ने 28 सितंबर को गड़ाग में एक पैसे के लेन-देन का बहाना बनाकर घर छोड़ा था, लेकिन अगले दिन सुबह 8 बजे पिता को मनीष के मोबाइल से एक व्हाट्सएप कॉल आया। कॉल पर एक अज्ञात व्यक्ति ने मनीष के अपहरण की सूचना दी और फिरौती न देने पर उसे जान से मारने की धमकी दी। पिता मनोहर पाटिल (62) ने तुरंत पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने मनीष के मोबाइल फोन को ट्रैक करने की कोशिश की, लेकिन वह बंद पाया गया। कुछ देर बाद, मनोहर को फिर एक अज्ञात नंबर से फोन आया, जिसमें पूछा गया कि क्या फिरौती की रकम की व्यवस्था हो गई है। इस बार पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए फोन नंबर को ट्रैक किया और उसका स्थान पता लगाया। तकनीकी जांच के बाद पुलिस को पता चला कि मनीष अपने दो दोस्तों के साथ हसन में एक घर में छिपा हुआ है। पुलिस जब हसन स्थित उस घर में पहुंची और दरवाजा खोला, तो उन्होंने मनीष को अपने दोस्तों के साथ आराम से बैठे हुए पाया। पुलिस के अनुसार, मनीष ने यह पूरी योजना अपने दोस्तों के साथ मिलकर रची थी। अपहरण की कॉल आने के बाद, मनीष ने कुछ बार फोन किया और फिर उसे बंद कर दिया। यह सब पिता को डराने और पैसे ऐंठने के लिए किया गया था। पुलिस ने इस मामले का खुलासा करते हुए मनीष और उसके दोनों दोस्तों को गिरफ्तार कर लिया है। ये दोनों दोस्त मनीष के अपराध में सहयोगी थे। पुलिस ने तीनों को हिरासत में ले लिया है और आगे की जांच कर रही है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कैसे लोग पैसों के लालच में ऐसे अपराधों को अंजाम दे देते हैं। पिता की चिंता और पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने इस मामले को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मनीष पटेल, जो एक लकड़ी के व्यापारी का बेटा है, ने अपने पिता से कहा था कि वह गड़ाग में एक पैसे के लेन-देन के लिए जा रहा है। उसने 28 सितंबर को घर छोड़ा था। इस घटना के बाद, उसके पिता ने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मोबाइल फोन को ट्रैक करने की कोशिश की, लेकिन वह बंद पाया गया। कुछ देर बाद, मनोहर को फिर एक अज्ञात नंबर से फोन आया, जिसमें पूछा गया कि क्या पैसे की व्यवस्था हो गई है। पुलिस ने उस नंबर को ट्रैक किया और उसका स्थान पता लगाया। पुलिस जब घर पहुंची और दरवाजा खोला, तो उन्होंने मनीष को अपने दोस्तों के साथ आराम से बैठे हुए पाया। पुलिस के अनुसार, मनीष ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर यह पूरी योजना रची थी। पिता को डराने के लिए यह सब किया गया था। यह मामला तब सामने आया जब पिता ने अपने बेटे के अपहरण की सूचना दी और फिरौती की मांग की। पुलिस की सक्रियता और तकनीकी जांच के कारण आरोपी जल्द ही पकड़े गए। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इस योजना में किसी और की भी संलिप्तता थी या यह सिर्फ मनीष और उसके दोस्तों का काम था।
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