मेला 9 एवं 10 अक्टूबर को होगा आयोजित, श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु मार्ग निर्धारित किए गए हैं
मुरैना में 10 अक्टूबर को होने वाले शनि मेले की तैयारियों को लेकर जिला अधिकारियों की बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत कमलेश कुमार भार्गव ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं 8 अक्टूबर तक हर हाल में पूर्ण कर ली जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मेले के लिए सौंपे गए दायित्वों का निर्वहन संबंधित अधिकारी स्वयं करें और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मेले का आयोजन 9 एवं 10 अक्टूबर को ग्राम ऐंती स्थित शनि मंदिर पर शनिश्चरी अमावस्या के अवसर पर किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। बैठक में भार्गव ने विभिन्न विभागों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए। पुलिस विभाग को जंगल क्षेत्र के मार्गों पर गश्त बढ़ाने, मंदिर परिसर में पर्याप्त बैरिकेडिंग, सीसीटीवी कैमरे लगवाने, आपातकालीन निकास की व्यवस्था सुनिश्चित करने और प्रभावी संचार प्रणाली स्थापित करने के निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त, पार्किंग व्यवस्था को सुचारू बनाने पर भी जोर दिया गया ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। स्वास्थ्य विभाग को मेले के दौरान चार एंबुलेंस, एक अस्थाई अस्पताल, पर्याप्त संख्या में चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती करने के साथ-साथ आवश्यक दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक रखने के निर्देश दिए गए। नाइयों का भी पंजीकरण कराने की बात कही गई ताकि स्वच्छता और व्यवस्था बनी रहे। विद्युत विभाग को मेला अवधि में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया, ताकि प्रकाश, संचार और अन्य आवश्यक सेवाओं में कोई बाधा न आए। लोक निर्माण विभाग को सड़कों की मरम्मत, बैरिकेड्स और ड्रॉप गेट की व्यवस्था को दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई। पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था के लिए टैंकरों, मोटरों और पाइपलाइनों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ-साथ शनि मंदिर और मेले के मार्ग में स्थित पेयजल स्रोतों को चालू रखने के निर्देश दिए गए। नगर निगम और नगरीय निकायों को अग्निशमन वाहन, पर्याप्त अस्थाई शौचालय और सफाई कर्मचारियों की व्यवस्था करने को कहा गया, ताकि परिसर साफ-सुथरा रहे। पशुपालन विभाग को आवारा गौवंश, जंगली जानवरों और मधुमक्खियों के छत्तों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए विभिन्न मार्गों का निर्धारण किया गया है।



