समाचार
Opening page
Preparing your workspace...
मुंबई: भारतीय शेयर बाजार लगातार आठवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ। यह पिछले 25 वर्षों में सबसे लंबी साप्ताहिक मंदी साबित हुई है। इस दौरान घरेलू इक्विटी बेंचमार्क में करीब 9 फीसदी की बड़ी कमजोरी दर्ज की गई, जिसके परिणामस्वरूप निवेशकों के 26 लाख करोड़ रुपए से अधिक डूब गए। यह गिरावट 2001 के बाद पहली बार इतनी लंबी अवधि तक चली है और कोविड-19 लॉकडाउन के शुरुआती दौर (सात सप्ताह) की गिरावट को भी पीछे छोड़ दिया है। आठ हफ्तों की इस निरंतर गिरावट में निफ्टी करीब 8.7 प्रतिशत और सेंसेक्स लगभग 8.4 प्रतिशत नीचे आ चुका है। अंकों के लिहाज से देखें तो सेंसेक्स पिछले आठ हफ्तों में 6,590 अंक टूटा, जबकि निफ्टी में 2,149 अंक की गिरावट आईबीते कारोबारी सत्र में भी बीएसई सेंसेक्स 570.59 अंक गिरकर 71,909.70 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 में 199 अंक की गिरावट आई और यह 22,422 पर बंद हुआ। बाजार की इस भारी गिरावट के पीछे कई प्रमुख कारक जिम्मेदार हैं। इनमें सबसे अहम विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की भारतीय शेयर बाजार से जारी पूंजी निकासी है। सितंबर माह में एफआईआई ने करीब 44,013 करोड़ रुपए की बड़ी पूंजी निकाली, जिससे बाजार पर सीधा दबाव बना। एफआईआई की लगातार बिकवाली ने निवेशकों के भरोसे को हिला दिया है, जिससे बाजार में बिकवाली का दबाव और बढ़ गया है। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल भी एक बड़ी चिंता का विषय है। ब्रेंट क्रूड का 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचना भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें सीधे तौर पर महंगाई को बढ़ा सकती हैं, जिससे आम आदमी की मुश्किलें बढ़ेंगी। साथ ही, इससे देश का आयात बिल भी बढ़ेगा और रुपये पर अतिरिक्त दबाव आएगा, जो पहले से ही कमजोर है।
इन सभी नकारात्मक कारकों के चलते शेयर बाजार में लगातार गिरावट का रुख बना हुआ है। बीएसई सेंसेक्स 570.59 अंक की गिरावट के साथ 71,909.70 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 में 199 अंक की गिरावट दर्ज की गई और यह 22,422 पर बंद हुआ। कुल मिलाकर, शेयर बाजार में यह आठ हफ्तों की गिरावट 2001 के बाद सबसे लंबी साप्ताहिक मंदी है। इसने कोविड-19 लॉकडाउन के शुरुआती सात सप्ताह की गिरावट को भी पीछे छोड़ दिया है। इस लंबी मंदी के कारण निवेशकों की संपत्ति में भारी कमी आई है। कुल मार्केट कैप 26 लाख करोड़ रुपए से घटकर 467 लाख करोड़ रुपए के नीचे आ गया है। निफ्टी में लगभग 8.7 प्रतिशत और सेंसेक्स में करीब 8.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। अंकों के लिहाज से देखें तो सेंसेक्स में 6,590 अंकों की और निफ्टी में 2,149 अंकों की गिरावट आई है। बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली, कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और रुपये की कमजोरी प्रमुख कारण बने हुए हैं।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में हो रही वृद्धि के कारण भी विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ रहे हैं। 10 साल की अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 5.3 फीसदी तक पहुंच गई है, जो 2002 के बाद का उच्चतम स्तर है।
इस खबर पर आपकी प्रतिक्रिया