भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय बैठक सोमवार से शुरू हो गई है। इस बैठक में रेपो रेट में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी की प्रबल संभावना जताई जा रही है। फरवरी 2023 के बाद यह पहली बार होगा जब केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में इजाफा करेगा। बढ़ती महंगाई और वैश्विक दबाव इस संभावित फैसले के मुख्य कारण माने जा रहे हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई हैं। इसका सीधा असर परिवहन लागत पर पड़ेगा और रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम भी बढ़ने की आशंका है। यह स्थिति देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रही है, क्योंकि इससे महंगाई और बढ़ सकती है। अगस्त 2023 में खुदरा महंगाई दर 4.82 फीसदी पर पहुंच गई थी। यह दर जुलाई के मुकाबले अधिक थी और लगातार तीसरे महीने आरबीआई के 4 फीसदी के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। यह लगातार वृद्धि आरबीआई के लिए चिंता का विषय है और नीतिगत समायोजन की आवश्यकता को दर्शाती है। अगर आरबीआई ब्याज दरों में वृद्धि करता है, तो यह मौजूदा 5.25 फीसदी से बढ़कर 5.50 फीसदी हो जाएगा। यह कदम उपभोक्ताओं और व्यवसायों दोनों के लिए महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि इससे कर्ज लेना महंगा हो जाएगा। ईएमआई पर इसका सीधा असर पड़ेगा। वैश्विक केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने का रुख भी भारतीय रिजर्व बैंक पर दबाव डाल रहा है। रुपये को स्थिर रखने और विदेशी पूंजी के बहिर्वाह को रोकने के लिए यह कदम जरूरी माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिदृश्य में यह एक आम प्रवृत्ति बन गई है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और घरेलू महंगाई का दबाव आरबीआई के इस संभावित फैसले की मुख्य वजहें हैं। इन दोनों कारकों ने मिलकर मौद्रिक नीति के समक्ष एक जटिल स्थिति पैदा कर दी है।
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ईएमआई पर 7 अक्टूबर को फैसला
6 अक्टूबर 2026 को 12:32 am बजे

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