आरबीआई के फैसले से पहले कच्चे तेल की नरमी और एफपीआई की शॉर्ट कवरिंग ने बाजार को संभाला
पिछले हफ्ते शेयर बाजार में लगातार चार कारोबारी सत्रों में आई बड़ी गिरावट के बाद इस हफ्ते माहौल में तेजी लौट आई है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 0.95 फीसदी या 685 अंक बढ़कर 73,067 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 0.98 फीसदी या 220 अंक की बढ़त के साथ 22,776 पर पहुंच गया। बाजार में इस तेजी के पीछे कई अहम वजहें बताई जा रही हैं, जिनमें सबसे प्रमुख भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक का नतीजा है। आरबीआई की तीन दिवसीय एमपीसी बैठक सोमवार से शुरू हो चुकी है और इसका फैसला बुधवार को आने वाला है। बाजार में इस बात की प्रबल उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक इस बार अपनी प्रमुख ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। अमेरिका से आए महंगाई और नॉन-फार्म पेरोल के आंकड़ों के बाद अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका कम हुई है, जिसका सकारात्मक असर भारतीय बाजार पर भी दिख रहा है। इस स्थिति में, आरबीआई पर भी ब्याज दरें बढ़ाने का तत्काल दबाव कम हो गया है, जिससे बाजार को स्थिरता की उम्मीद बंधी है। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने भी भारतीय शेयर बाजार को बड़ा सहारा दिया है। हाल की तेजी के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है। मध्य पूर्व में सप्लाई से जुड़ी दिक्कतें कुछ हद तक कम होने और कुछ प्रमुख तेल उत्पादक देशों द्वारा उत्पादन बढ़ाने के संकेतों से कीमतों पर दबाव कम हुआ है। यह नरमी भारतीय आयातकों के लिए राहत भरी है और व्यापार घाटे को कम करने में भी मदद कर सकती है, जिससे बाजार की धारणा मजबूत हुई है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की 'शॉर्ट कवरिंग' ने भी बाजार में आई तेजी में अहम भूमिका निभाई है। हालिया गिरावट के दौरान विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में बड़ी मात्रा में शॉर्ट पोजीशन बनाई थी। अब जब बाजार ओवरसोल्ड जोन में पहुंच गया है, इन निवेशकों ने अपनी शॉर्ट पोजीशन को बंद करना शुरू कर दिया है। इस प्रक्रिया को शॉर्ट कवरिंग कहा जाता है और इसने पिछले दो कारोबारी सत्रों में बाजार को ऊपर चढ़ने में काफी मदद की है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट का असर भी भारतीय शेयर बाजार पर सकारात्मक रहा है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में कमी से दुनिया भर के बाजारों पर ब्याज दरों का दबाव कम होता है, जिसका फायदा उभरते बाजारों को मिलता है। भारत भी ऐसे बाजारों में शुमार है, इसलिए इस गिरावट ने विदेशी निवेशकों को भारतीय बाजार में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया है। भारत में महंगाई को लेकर फिलहाल वैसी चिंता नहीं है जैसी अमेरिका में देखी जा रही है।




