जीएसटी संग्रह में पिछले वर्ष की तुलना में 25.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो आर्थिक गतिविधियों में व्यापक विस्तार और कर दरों की सुदृढ़ संरचना का संकेत देता है। यह उत्साहवर्धक आधार उन सुधारों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है जिनका उद्देश्य उद्यमों और सार्वजनिक वित्त दोनों को संबल प्रदान करना है। हालिया राजस्व आंकड़े इस सुदृढ़ता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं, जिससे पता चलता है कि जीएसटी की परिपक्वता सुधारों के अगले चरण के लिए एक सशक्त आधार प्रदान करती है। इन चार महीनों का कुल संग्रह मिलकर लगभग 15 प्रतिशत की गति से बढ़ा। कर वापसी (रिफंड) के बाद शुद्ध संग्रह में भी इस छमाही के दौरान 10.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस प्रकार, करदाताओं को दी गई राहत और विकास के लिए उपलब्ध संसाधनों में वृद्धि साथ-साथ हुई है। इस विस्तार का दायरा उसके पैमाने जितना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि सभी 11 क्षेत्रक समूहों और सभी प्रमुख राज्यों में कर-योग्य आपूर्ति में वृद्धि देखी गई है। भारत जैसी विविध अर्थव्यवस्था में यह व्यापक प्रसार अत्यंत महत्वपूर्ण है। विभिन्न क्षेत्रों और भौगोलिक हिस्सों में होने वाली यह वृद्धि अधिक से अधिक व्यवसायों को विस्तार लेते बाजारों में भाग लेने का अवसर देती है। इसके परिणामस्वरूप उत्पन्न मांग, निवेश तथा रोजगार से अधिकाधिक समुदायों को लाभान्वित किया जाता है। जब कर राहत का प्रभाव कीमतों में दिखाई देता है, तो परिवारों के पास अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने या बचत करने के लिए अधिक गुंजाइश होती है। उपभोक्ता राहत और उद्यम विकास आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं। परिवारों की क्रय शक्ति व्यवसायों द्वारा दी जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की मांग को बनाए रखती है। इसका लाभ परिवार से लेकर खुदरा विक्रेता, आपूर्तिकर्ता और उत्पादक तक पहुंचता है, जो एक सुदृढ़ आर्थिक चक्र का निर्माण करता है। इस व्यवस्था में सहभागिता अत्यंत व्यापक रही है। अगस्त के अंत तक केंद्र और राज्य क्षेत्राधिकारों के अंतर्गत कुल जीएसटी पंजीकरण लगभग 1.71 करोड़ तक पहुंच गए, जो एक वर्ष पहले की तुलना में लगभग 15 प्रतिशत अधिक हैं। इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) की कार्यप्रणाली इस अनुभव का एक अन्य महत्वपूर्ण हिस्सा है। सुधार-उपरांत आंकड़े दर्शाते हैं कि आइटीसी के माध्यम से चुकाई गई कर देयता का अनुपात बढ़ा है, जबकि कर-योग्य आपूर्ति के सापेक्ष संचित क्रेडिट में कमी आई है। यह उन व्यवसायों के लिए उत्साहवर्धक है जो पात्र क्रेडिट के प्रभावी उपयोग पर निर्भर करते हैं। किसी छोटे उद्यम के लिए उसकी कार्यशील पूंजी यह तय करती है कि वह कितनी सुगमता से कच्चा माल खरीद सकता है, कोई आर्डर पूरा कर सकता है और अगला काम हाथ में ले सकता है। कर वापसी (रिफंड) भी उतनी ही प्रासंगिक है। राज्यों की राजस्व स्थिति भी अधिक सुदृढ़ हुई है। यह वृद्धि राज्यों को सार्वजनिक सेवाओं और अवसंरचना विकास के लिए अधिक संसाधन प्रदान करती है, जो राष्ट्रीय विकास के लिए महत्वपूर्ण है। सात अक्टूबर को जीएसटी परिषद के समक्ष रखे जाने वाले प्रस्ताव राज्यों के साथ निरंतर विचार-विमर्श और समन्वय से तैयार किए गए हैं। ये प्रस्ताव अनुपालन में लगने वाले समय और लागत को कम करने के उद्देश्य से पंजीकरण, रिटर्न, रिफंड, विवादों के निपटारे और इनपुट टैक्स क्रेडिट के सुगम प्रवाह से जुड़े हैं। करदाताओं का अनुभव ही इसके क्रियान्वयन का मुख्य मार्गदर्शक बना रहना चाहिए। जीएसटी की बढ़ती परिपक्वता हमें सुधारों के अगले चरण के लिए एक सशक्त आधार प्रदान करती है। 'नेक्स्ट-जेनरेशन जीएसटी' का लक्ष्य कर दरें कम करना और अनुपालन सरल बनाना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप, इसकी परिकल्पना दो परस्पर जुड़े उद्देश्यों के साथ की गई थी: कर दरों को कम एवं तर्कसंगत बनाना और अनुपालन को अधिक सरल बनाना। पिछले बारह वर्षों में सरकार ने इन अनुकूल परिस्थितियों के निर्माण के लिए निरंतर कार्य किया है। वर्ष 2017 में जीएसटी लागू होने से अप्रत्यक्ष कराधान के लिए एक साझा राष्ट्रीय ढांचा स्थापित हुआ। 'नेक्स्ट-जेनरेशन का जीएसटी' नौ वर्षों के क्रियान्वयन तथा करदाताओं और राज्यों के अनुभवों के आधार पर इसी प्रयास को आगे बढ़ाता है। समग्र रूप से, इन प्रयासों का उद्देश्य परिवारों को राहत देना, व्यवसायों को अधिक निश्चितता प्रदान करना और करदाताओं के लिए एक ऐसी प्रणाली सुनिश्चित करना है जिसमें वे बिना किसी अनावश्यक कठिनाई के अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें। राज्य इस पूरी यात्रा में बराबर के साझेदार रहे हैं, जिन्होंने परिषद में अपनी प्राथमिकताओं और अनुभवों को लेकर निर्णयों को आकार देने में सहयोग किया और उनके क्रियान्वयन का दायित्व संभाला। एक भरोसेमंद कर प्रणाली उद्यमों को अपने तात्कालिक दायित्वों से आगे बढ़कर योजना बनाने तथा ऐसे अवसरों में निवेश करने में सक्षम बनाती है जिनके फलने-फूलने में समय लगता है। 'विकसित भारत' बनने के संकल्प के लिए ऐसी अर्थव्यवस्था की आवश्यकता है जिसमें हर स्तर और आकार के उद्यम फल-फूल सकें, चाहे उनकी शुरुआत कहीं से भी हुई हो।
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जीएसटी संग्रह में 25.8% की वृद्धि दर्शाती है मजबूत आर्थिक गति
6 अक्टूबर 2026 को 11:56 pm बजे

जीएसटी संग्रह में 25.8% की वृद्धि दर्शाती है मजबूत आर्थिक गति
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