यह समारोह इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। इसने न केवल समाजसेवियों को सम्मानित किया, बल्कि गांधी के विचारों को भी नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद की।
समाज सेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य और राष्ट्रहित में योगदान देने वाली विभूतियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से गांधी नगर साहित्य सेवा संस्थान चैरिटेबल ट्रस्ट, गुजरात की ओर से ‘गांधी अंतरराष्ट्रीय शांति सम्मान 2026’ का एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह आभासी समारोह गूगल मीट के माध्यम से संपन्न हुआ, जिसमें देश- विदेश के विभिन्न राज्यों से गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का आयोजन संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष गुलाबचंद पटेल तथा कर्नाटक राज्य अध्यक्ष मलकप्पा उर्फ महेश के नेतृत्व में किया गया, जिसका उद्देश्य समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य विनीता लावण्या के संचालन और गुजरात की नसीम बानु द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। समारोह में मुख्य अतिथि अरूधभारती स्वामीजी, बेंगलूरु सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े समाजसेवियों, शिक्षाविदों, साहित्यकारों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। मुख्य अतिथि ने अपने संदेश में समाज सेवा को जीवन की सार्थकता और राष्ट्र सेवा का सबसे प्रभावी माध्यम बताया। उन्होंने इस महत्वपूर्ण पहल के लिए संस्थान की सराहना की और सभी सम्मानित व्यक्तियों को उनकी सेवाओं के लिए शुभकामनाएं दीं। समारोह के दौरान, उपस्थित प्रतिभागियों ने महात्मा गांधी के विचारों, शांति के संदेश और वर्तमान समय में उनकी प्रासंगिकता पर अपने विचार विस्तार से रखे। वक्ताओं ने विशेष रूप से शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में वंचित वर्गों, बच्चों और महिलाओं के लिए कार्य करने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। यह भी आह्वान किया गया कि युवाओं को सही दिशा प्रदान की जाए, उनकी प्रतिभा को निखारा जाए और उनमें समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित किया जाए। संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष गुलाबचंद पटेल ने सभी प्रतिभागियों का हार्दिक अभिनंदन किया। उन्होंने मलकप्पा उर्फ महेश द्वारा किए गए प्रयासों की विशेष रूप से सराहना की। पटेल ने कहा कि देश के विभिन्न क्षेत्रों में जरूरतमंदों की सेवा के लिए समर्पित लोगों के कार्यों में महात्मा गांधी के विचारों की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान समय में गांधीवादी मूल्यों, मानवीय संवेदना और सामाजिक दायित्वों को अपनाने की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। इस अवसर पर चयनित समाजसेवियों को उनके सेवा कार्यों के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान समाज सेवा को प्रोत्साहन देने, गांधीवादी विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और राष्ट्र निर्माण में जनभागीदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से दिया गया। समारोह ने समाज के प्रति समर्पण और सेवा भाव को एक नई दिशा प्रदान की। समाज सेवा को जीवन का आधार मानने वाले लोगों के लिए यह कार्यक्रम एक प्रेरणा स्रोत बना। गांधीनगर साहित्य सेवा संस्थान चैरिटेबल ट्रस्ट, गुजरात द्वारा आयोजित ‘गांधी अंतरराष्ट्रीय शांति सम्मान 2026’ ने उन विभूतियों को मंच प्रदान किया जिन्होंने निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा की है। इस आभासी आयोजन में विभिन्न राज्यों और विदेशों से जुड़े लोगों ने भाग लेकर इसे एक वैश्विक मंच प्रदान किया। मुख्य अतिथि अरूधभारती स्वामीजी ने अपने संबोधन में कहा कि समाज सेवा ही सच्चा राष्ट्रधर्म है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति समाज की सेवा करता है, वह अप्रत्यक्ष रूप से राष्ट्र की सेवा करता है। उनके शब्दों ने उपस्थित सभी लोगों को प्रेरित किया और सेवा भाव को और अधिक मजबूत करने का संकल्प दिलाया।






