बुधवार को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में कैप्टन स्मित मछार पर हुए हमले ने एक बार फिर आतंकवाद के खतरे को सामने ला दिया है। उड़ान के दौरान सह-पायलट ने धारदार चीज से कैप्टन पर हमला कर दिया, जिससे विमान तेजी से नीचे जाने लगा। इस भयावह स्थिति में भी कैप्टन स्मित ने हिम्मत नहीं हारी और गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, खून से लथपथ हालत में, उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया। यह उनका सूझबूझ और बहादुरी भरा निर्णय था जिसने विमान में सवार 174 यात्रियों की जान बचाई और एक बड़ी त्रासदी को टाल दिया। हालात को भांपते ही विमान के अन्य क्रू सदस्य और कुछ यात्री तुरंत कॉकपिट में घुसे और हमलावर सह-पायलट पर काबू पा लिया। इस घटना के बाद विमान किसी बड़े हादसे का शिकार होने से बच गया, जिसमें कई यात्रियों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कैप्टन स्मित ने जिस तरह की जटिल और खतरनाक स्थिति में अपनी हिम्मत, कर्तव्य और बहादुरी को बनाए रखा, वह अविश्वसनीय है। उनकी इस कार्रवाई ने न केवल यात्रियों की जान बचाई, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में साहस की एक नई मिसाल भी कायम की। कैप्टन स्मित मछार को आज दुनिया भर में अदम्य साहस की मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है। उनकी इस बहादुरी के लिए इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनकी काफी प्रशंसा की और उन्हें एक वास्तविक नायक बताया। हालांकि, इस घटना ने एक गंभीर चिंता को भी जन्म दिया है।
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सह-पायलट के जानलेवा हमले को कैप्टन स्मित ने बहादुरी से झेला, 174 यात्रियों की जान बचाई
5 अक्टूबर 2026 को 1:15 am बजे

सह-पायलट के जानलेवा हमले को कैप्टन स्मित ने बहादुरी से झेला, 174 यात्रियों की जान बचाई
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