आरबीआई दर वृद्धि और वैश्विक तनाव ने बढ़ाई गिरावट
शेयर बाजार में गुरुवार को भारी गिरावट देखी गई, जिससे निवेशकों को बड़ा झटका लगा। दोपहर के कारोबार के दौरान, बीएसई सेंसेक्स 1045.46 अंक या 1.44% गिरकर 72,638.70 के पिछले बंद भाव के मुकाबले 71,575.16 पर आ गया। वहीं, एनएसई निफ्टी 371.5 अंकों या 1.64% की गिरावट के साथ 22,231.80 पर बंद हुआ, जबकि पिछले बंद भाव 22,603.05 था। शाम 2 बजे तक, सेंसेक्स 1,063 अंक गिरकर 71,575.16 पर था और निफ्टी 359.45 अंक गिरकर 22,243.60 पर आ गया था। इस गिरावट के कारण बाजार में दहशत का माहौल बन गया। बाजारों की सुस्त शुरुआत हुई थी, जिसमें एनएसई निफ्टी 22,542.00 पर खुला, जो 61.05 अंक या 0.27% नीचे था। यह गिरावट पिछले दो सत्रों की बढ़त के सिलसिले को तोड़ने के बाद आई। यह लगभग चार वर्षों में पहली दर वृद्धि थी। मौद्रिक नीति समिति के छह सदस्यों ने सर्वसम्मति से इस वृद्धि का समर्थन किया और अपने रुख को 'तटस्थ' से 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' में बदल दिया। इस फैसले ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के बीच शेयर बाजारों में गिरावट आई। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत में 4% की वृद्धि दर्ज की गई। इसी समय, ब्रेंट क्रूड का 104 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचना भी दबाव का एक कारण बना। एशियाई और यूरोपीय बाजारों में भी गिरावट देखी गई, और अमेरिकी वायदा भी नीचे आ गए। यह सब वैश्विक अनिश्चितता का संकेत था। क्षेत्रीय स्तर पर, निफ्टी मेटल प्रमुख पिछड़ने वालों में से एक रहा, जो 3% से अधिक गिर गया। इसके बाद स्वास्थ्य सेवा और फार्मा सेक्टर में भी गिरावट आई। सभी व्यापक बाजार सूचकांक लाल निशान में समाप्त हुए, जिसमें निफ्टी मिडकैप 50 सबसे ज्यादा गिरा, जो 2.71% था। यह व्यापक गिरावट बाजार की कमजोरी को दर्शाती है। निवेशकों ने बुधवार को 4% की गिरावट देखी, जिसमें सेंसेक्स 429.11 अंक गिरकर 72,638.70 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 173.05 अंक गिरकर 22,603.05 पर आ गया। यह गिरावट बाजार में बड़ी बिकवाली का संकेत थी। शेयरों में बिकवाली का दबाव बढ़ गया, जिससे सेंसेक्स 1,045 अंक की गिरावट के साथ 71,575.16 पर आ गया। निफ्टी 359.45 अंक गिरकर 22,243.60 पर पहुंच गया। यह गिरावट बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। यह नुकसान बाजार की अस्थिरता और वैश्विक अनिश्चितताओं का परिणाम था। निवेशकों में चिंता का माहौल देखा गया। आगे चलकर, बाजार की चाल वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और आरबीआई की भविष्य की मौद्रिक नीति पर निर्भर करेगी। निवेशकों को सतर्क रहने और विवेकपूर्ण निवेश निर्णय लेने की सलाह दी गई है।




